नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट पेश करने जा रही हैं। सीतारमण, संसद में केंद्रीय बजट पेश करने वाली पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री हैं। आम चुनाव 2019 से पहले, अंतरिम बजट 2019 पीयूष गोयल ने पेश किया था। अरुण जेटली की बीमारी के बाद गोयल को अस्थायी रूप से वित्त मंत्री का प्रभार दिया गया था। हालांकि, इस बार केंद्रीय बजट 2019 निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। इससे पहले, इंदिरा गांधी केंद्रीय बजट भी पेश कर चुकी हैं लेकिन वह पूर्णकालिक वित्त मंत्री नहीं थीं।

आर्थिक वृद्धि और रोजगार पैदा करने की गति पर रहेगा जोर

बजट में राजकोषीय घाटे को काबू में रखने के साथ आर्थिक वृद्धि और रोजगार पैदा करने को गति देने पर सरकार का जोर रह सकता है। राजकोषीय स्थिति मजबूत करने के लिए टैक्स का दायरा बढ़ाने और इसका अनुपालन बेहतर करने के इरादे से 10 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाने वालों पर 40% की एक नई दर से टैक्स लगाया जा सकता है। नौकरी करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण आयकर के मोर्चे पर कर स्लैब में बदलाव की उम्मीद की जा रही है। 2019-20 के अंतरिम बजट में 5 लाख रुपए तक की आय पर कर छूट देने की घोषणा की गई थी।

5 से 8 लाख तक की आय पर नया टैक्स स्लैब

फिलहाल 2.5 लाख रुपए से 5 लाख रुपए की आय पर 5%, 5 लाख रुपए से 10 लाख रुपए तक की इनकम पर 20 प्रतिशत और 10 लाख रुपए से ऊपर की आय पर कर की दर 30 प्रतिशत है। यह बजट ग्लोबल आर्थिक नरमी और मौसम विभाग के देश के कुछ भागों में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंकाओं के बीच आ रहा है। पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में आर्थिक वृद्धि दर 5 साल के न्यूनतम स्तर यानी 6.8 तक गिर गई थी। चालू वित्त वर्ष के दौरान इसे फिर से 7% से ऊपर पहुंचाने का दारोमदार बजट पर होगा।

5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था पर नजर

संसद में गुरुवार को पेश 2018-19 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि 2024-25 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए सतत रूप से 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने की जरूरत होगी। इसमें निजी क्षेत्र का निवेश, मांग और निर्यात बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है।

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आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए वित्त मंत्री निवेश आकर्षित करने के इरादे से नियमों को उदार बनाने के प्रस्ताव कर सकती हैं। सरकार के समक्ष एक तरफ राजकोषीय स्थिति को मजबूत बनाने की जरूरत होगी तो दूसरी तरफ चुनावों में जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में पहल करनी होगी।

भारतीय जनता पार्टी ने आम चुनावों से पहले जारी घोषणापत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का फायदा सभी किसानों को देने और छोटे व सीमांत किसानों को 60 साल की उम्र के बाद पेंशन देने का वादा किया गया है। हालांकि, मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल की पहली मंत्रिमंडल की बैठक में इस दिशा में पहल कर दी है।