लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को तय किया कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना के वित्तपोषण के लिए कारपोरेशन बैंक को पंजाब नेशनल बैंक की अगुवाई वाले कंसोर्टियम का हिस्सा बनाया जाएगा। कारपोरेशन बैंक परियोजना के लिये 1,000 करोड़ रुपये का रिण उपलब्ध करायेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में उक्त फैसला किया गया। बैठक के बाद कैबिनेट के फैसलों की जानकारी राज्य सरकार के प्रवक्ताद्वय उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने यहां संवाददाताओं को दी।

सिंह ने कहा, ''पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना के वित्तपोषण के लिए कारपोरेशन बैंक को पंजाब नेशनल बैंक की अगुवाई वाले कंसोर्टियम का हिस्सा बनाया जाएगा ।'' उन्होंने कहा, ''विजया बैंक द्वारा दिये जा रहे 1,000 करोड रूपये के रिण को बैंक आफ बडौदा द्वारा दिया माना जाएगा। कारपोरेशन बैंक परियोजना के लिए 1,000 करोड रूपये रिण देगा।''

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सिंह ने बताया कि इस तरह अब परियोजना में कंसोर्टियम द्वारा कुल 8,800 करोड रूपये का वित्तपोषण होगा जो पहले 7,800 करोड रूपये था। शर्मा ने बताया कि राज्य मंत्रिपरिषद ने एक अन्य फैसले में तय किया कि मुख्यमंत्री आवास योजना— ग्रामीण की धनराशि पात्र व्यक्तियों को तेजी से उपलब्ध कराने के लिए अब पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) लिंक्ड स्टेट नोडल एकाउंट से धनराशि सीधे योजना के लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

सिंह ने बताया कि राज्य कैबिनेट ने फैसला किया कि प्रदेश का सूचना विभाग अब राजकीय प्रेस के साथ साथ निजी प्रिंटिंग प्रेस से भी छपायी का कार्य करा सकेगा। गुणवत्ता और मूल्य के आधार पर राजकीय प्रेस को वरीयता दी जाएगी। शर्मा ने बताया कि एक अन्य फैसले में कैबिनेट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए प्रयागराज के थार्नहिल रोड पर कांफ्रेंस हाल, दो वीआईपी सुइटस और एक संग्रहालय निर्माण के लिए 4,599. 88 लाख रूपये का प्रस्ताव स्वीकृत किये गये हैं। साथ ही न्यायालय के उपयोग के लिए मल्टीलेवल पार्किंग और अधिवक्ता चेंबर बनाये जाने के लिए 530.07 करोड रूपये का प्रस्ताव मंजूर किया।

प्रवक्ता ने बताया कि कैबिनेट ने सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा—102 और 115 में संशोधन तथा माध्यस्थम व सुलह अधिनियम 1996 में न्यायालय की परिभाषा में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया। उन्होंने बताया कि धारा—102 में '25 हजार रूपये' के स्थान पर '50 हजार रूपये' और धारा—115 में 'पांच लाख रूपये' के स्थान पर '25 लाख रूपये' रखा जाएगा। माध्यस्थम व सुलह अधिनियम 1996 में न्यायालय की परिभाषा में संशोधन से उच्च न्यायालय के स्थान पर जिला न्यायालयों में मामलों की सुनवाई हो सकेगी।