चमकी बुखार: SC में याचिका दायर कर 500 ICU और अतिरिक्त डॉक्टरों की मांग

डिजाइन इमेज - Sakshi Samachar

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से त्राहिमाम की स्थिति है। अब तक 111 बच्चों ने दम तोड़ दिया है। जिसके बाद लोगों का भरोसा सरकार और प्रशासन से उठने लगा है। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मुजफ्फरपुर के अस्पताल में 500 आईसीयू और अतिरिक्त पेशेवर डॉक्टरों के इंतजाम की मांग की गई है। याचिका में कम से कम 100 मोबाइल आईसीयू बनाने की मांग की गई है।

याचिका में साफ तौर पर कहा गया है कि बिहार सरकार मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत की त्रासदी से निपटने में पूरी तरह विफल रही है। मुख्यमंत्री के दौरे के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं है। सरकार तमाम प्रयासों के बावजूद ये तक पता लगाने में विफल है कि आखिर बच्चों की मौत की असली वजह क्या है।

बिहार में 'चमकी' बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 111 हो गई। चमकी बुखार एक्यूट इन्सेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) को कहा जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर जिले के एक अस्पताल का दौरा किया और इस दौरान उन्हें नाराज लोगों द्वारा की गई नारेबाजी का सामना करना पड़ा। एसकेएमसीएच अस्पताल और केजरीवाल अस्पताल में मरने वालों की संख्या 110 हो गई है जबकि पड़ोसी पूर्वी चंपारण जिले में एक बच्चे की जान गई है। वैसे एईएस के ज्यादातर मामले मुजफ्फरपुर में सामने आए हैं लेकिन पड़ोस के पूर्वी चंपारण और वैशाली जैसे जिलों में भी इस तरह के मामलों की खबर है।

मौत ने भी की गुस्ताखी, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन के सामने गई 84 वें बच्चे की जान: मुजफ्फरपुर

इससे पहले, मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. शैलेश प्रसाद ने बताया था कि मंगलवार देर शाम तक एईएस (चमकी बुखार) से मरने वाले बच्चों की संख्या 109 हो गयी है, जिनमें से श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में 90 बच्चों और केजरीवाल अस्पताल में 19 बच्चों की मौत हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को एसकेएमसीएच पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों और चिकित्सकों के साथ बैठक की तथा कई आवश्यक निर्देश दिए।

भीषण गर्मी की मार झेल रहा बिहार, ९० मरे

वहीं बिहार में भीषण गर्मी और लू की चपेट में आने से 24 घंटे के भीतर और 12 लोगों की मौत हो गई। एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि पिछले तीन दिनों में 90 लोगों की मौत हो चुकी है।

अनाधिकारिक खबरों में हालांकि एक दर्जन जिलों में लोगों की मौत का आंकड़ा 250 तक पहुंचने का दावा किया गया है। ये मौतें औरंगाबाद, गया, नवादा और जमुई जिलों में हुई हैं। इन जिलों में 15, 16 और 17 जून को तापमान 42 से 45.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की वेबसाइट के मुताबिक, मंगलवार तक लगभग 90 मौतें हो चुकी हैं। औरंगाबाद में 41, गया में 35 और नवादा में 14 लोग लू की चपेट में आकर काल के गाल में समा गए।

झुलसा देने वाली गर्म हवाओं के कहर के मद्देनजर गया, बेगूसराय, दरभंगा, गोपालगंज, मधुबनी और सीतामढ़ी जिलों में पहली बार निषेधाज्ञा यानी आपराधिक दंड संहिता की धारा 144 लागू कर दी गई है।

बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने यहां मीडिया से कहा कि सरकार जांच कराएगी कि 15 जून को दोपहर बाद तीन से पांच बजे के बीच गर्म हवाओं का प्रकोप कैसे तेज हो गया, जिस कारण लू की चपेट में आने से लोगों के मरने की संख्या उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी अगले चार दिनों में पर्यावरणीय सर्वेक्षण करवाने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि दिए जाने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। सरकार ने गर्मी से सतर्क रहने और दिन के समय घर से बाहर न निकलने का परामर्श भी जारी कर चुकी है। मगध परिक्षेत्र के अवर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. विजय कुमार ने कहा कि लगभग 100 लोग गया, औरंगाबाद व नवादा के सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं और इन तीनों जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दर्जनों लोगों का उपचार चल रहा है।

Advertisement
Back to Top