बेंगलुरु : विवाह के बंधन को अगर कोई निभा रहा है तो वह है कर्नाटक के विजयपुर जिले के सिंधगी तालुक के यंकंची गांव का रहने वाला एक जाति का परिवार। क्या आप ऐसी अनोखी परंपरा के बारे में जानना चाहेंगे तो आइए, जानते हैं उनकी कहानी। यंकंची गांव में सैकड़ों वर्षों से जारी इस प्रथा पर पहले तो विश्वास नहीं हुआ, लेकिन यह बिलकुल सच है।

विवाह के बाद वर के हाथ-पैर में बेड़ियां डालकर उन्हें मंदिर में छोड़ दिया जाता है और भगवान के खुश होकर आदेश देने तक बेड़ियों में ही मंदिर में समय बिताना होता है। स्थानीय मजावर नामक इस परिवार में यह अनोखी प्रथा सदियों से चल रही है। बेड़ियों में जकड़े वर को दावल मल्लिक नामक मंदिर में छोड़ दिया जाता है।

दावल मंदिर में कैद वर
दावल मंदिर में कैद वर

इसे भी पढ़ें :

एक रुपया में हुआ अंतिम संस्कार, तेलंगाना की इस योजना को मिल रही है सफलता

कुछ दिन पहले तक दावल मल्लिक मंदिर में 18 दुल्हे बेड़ियों में जकड़े थे। कुछ दिन पहले छह लोगों को भगवान के मेहरबान होने से उन्हें बेड़ियों से मुक्त कर उनके घर भेज दिया गया। यह भी नियम है कि बेड़ियां हटने तक वर अपनी वधू के पास नहीं जा सकता। इस प्रथा का अनुसरण केवल मजावर परिवार ही कर रहा है और इसकी वजह का पता नहीं होने के बाद भी परिवार के बुजुर्गों के कहने पर उसका अनुसरण कर रहे हैं।