पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में AES या फिर चमकी बुखार से बच्चों की मौत का आंकड़ा 83 पहुंच चुका है। दर्जनों घरों के चिराग बुझने से पूरे जिले में हाहाकार की स्थिति है। सरकार का पूरा अमला लगा हुआ है इन मौत के आंकड़ों पर काबू पाने के लिए। हालांकि सारे प्रयास बेकार जा रहे हैं।

काल के गाल में समाए सभी बच्चे हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार हुए। ये वो स्थिति है जब मरीज के शरीर का ब्लड शुगर बेहद कम हो जाता है। साथ ही इलेक्ट्रोलाइट पूरी तरह असंतुलित हो जाता है। मरने वाले अधिकांश बच्चों की उम्र 10 साल से कम बताई जाती है।

मुजफ्फरपुर के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल अस्पताल में बच्चों की मौत से परिजनों की चीत्कार सुनने को मिल रही है। अभी भी अस्पताल में कई बच्चे भर्ती हैं जिनकी हालत बेहद गंभीर बताई जाती है।

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इस बीच केंद्रीय मंत्री सहित बड़े नेताओं के अस्पताल आने का सिलसिला जारी है। गृह राज्य मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले नित्यानंद राय ने भी अपने स्वागत के लिए आयोजित सभी कार्यक्रम रद्द कर दिया। साथ ही उन्होंने बच्चों की मौत पर शोक का इजहार किया।

सरकारी प्रयासों से नॉर्वे से विदेशी डॉक्टरों की एक टीम मुजफ्फरपुर पहुंची है। ये दल बीमारी की असल वजह पता लगाने का प्रयास कर रही है। वहीं इस बार भी बच्चों के खून के नमूने पुणे स्थित प्रयोगशाला में भेजा गया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने परिजनों को सलाह दी है कि वे अपने बच्चों को खाली पेट सोने न दें। साथ ही बच्चों को खाली पेट लीची खाने से रोकें। इस पूरे मामले में राज्य सरकार की लाचारगी साफ झलक रही है। केंद्रीय सहायता के बावजूद सरकार के अथक प्रयासों ने मौत का सिलसिले को नहीं रोक सका है। अब देखना है कि बच्चों की इहलीला समाप्त होने का ये दौर कब थमता है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर में मृत बच्चों और गया औरंगाबाद में लू से मरनेवालों के परिजनों को मुआवजे का एलान किया है। एक बार फिर नीतीश कुमार ने लोगों से अपील की है कि वो भीषण गर्मी में घरों से बाहर निकलने से बचें। साथ ही अस्पतालों को निर्देश दिया है कि मरीजों की देखभाल में किसी तरह की कोई कोताही नहीं बरती जाय।