नई दिल्ली : भारतीय सेना ने दावा किया है कि एक अभियान दल ने हिमालय के मकालू बेस कैंप के पास मायावी हिममानव 'येति' के रहस्यमय पैरों के निशान को देखा है।

सेना के अतिरिक्त सूचना महानिदेशालय ने सोमवार को ट्वीट किया, "पहली बार, भारतीय सेना के पर्वतारोहण अभियान दल ने मकालू बेस कैंप के करीब हिममानव 'येति' के रहस्यमयी पैरों के निशान देखे हैं।" इसने कहा, "इस मायावी हिममानव को इससे पहले सिर्फ मकालू-बरुन नेशनल पार्क में देखा गया है।"

मकालू-बरुन राष्ट्रीय उद्यान नेपाल के लिंबुवान हिमालय क्षेत्र में स्थित है। यह दुनिया का एकमात्र संरक्षित क्षेत्र है जिसमें 26,000 फुट से अधिक उष्णकटिबंधीय वन के साथ-साथ बर्फ से ढकी चोटियां हैं।

येति एक वानर जैसा प्राणी है, जो औसत मानव से बहुत अधिक लंबा और बड़ा है। यह मोटे फर में ढका हुआ होता है और माना जाता है कि यह हिमालय, साइबेरिया, मध्य और पूर्वी एशिया में रहता है। इस प्राणी को आमतौर पर एक किंवदंती के रूप में माना जाता है क्योंकि इसके अस्तित्व का कोई ठोस सबूत नहीं है।

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पहली बार बर्फ पर बने हिममानव के निशान

वैसे यह पहली बार नहीं है, जब बर्फ पर बने इन निशानों ने हिमालय पर हिममानव के संकेत दिए हैं। आधुनिक समय में सबसे पहले 1921 में हिममानव को देखने का दावा किया गया था। हेनरी न्यूमैन नाम के एक पत्रकार ने ब्रिटेन के खोजकर्ताओं के एक दल का इंटरव्यू लिया था। खोजकर्ताओं ने दावा किया था कि उनको पहाड़ पर पैरों के विशालकाय निशान दिखाई पड़े थे। उनके गाइड ने बताया था कि वे निशान मेतोह-कांगमी के हैं। मेतोह का मतलब होता है आदमी जैसा दिखने वाला भालू और कांगमी का मतलब बर्फों पर पाया जाने वाला इंसान।

नैशनल जिऑग्राफिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 326 ईसा पूर्व में सिकंदर ने सिंधु घाटी को जीता था। इस जीत के बाद सिकंदर ने हिममानव को देखने की इच्छा जताई थी। स्थानीय लोगों ने उनको बताया कि हिममानव काफी ऊंचाई पर पाए जाते हैं। कम ऊंचाई पर वे नहीं पाए जाते हैं जिस वजह से वे येती को पकड़ नहीं सकते हैं।