नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे लोकसभा चुनावों के लिए वीवीपैट पर्चियों के ईवीएम से मिलान को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक मतदान केन्द्र से बढ़ाकर पांच केन्द्र में किया जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि वीवीपैट मशीन के बिना क्रम जांच से आधिकारिक परिणामों की घोषणा में कुछ घंटे देरी हो सकती है। हालांकि इस तरह की व्यवस्था से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि वोट सही तरीके से दर्ज हुए हैं या नहीं। किसी लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल पहली बार किया जा रहा है। हालांकि, कुछ लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में इनका इस्तेमाल हो चुका है।

EVM awareness team
EVM awareness team

उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेदेपा नेता एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी नेताओं द्वारा दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया। अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि ‘आयोग उच्चतम न्यायालय के फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिये हरसंभव उपाय करेगा।' कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय के फैसले पर सोमवार को कहा कि यह तर्कसंगत नहीं है और इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्रजातंत्र में यह सबसे आवश्यक है कि हर व्यक्ति उसी को वोट दे जिसे वह चाहता है और उसका वोट उसी के खाते में जाए जिसे उसने दिया है। इसके बगैर प्रजातंत्र नहीं चलेगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘जब ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल लगाने का आदेश दिया तब निश्चित तौर पर उच्चतम न्यायालय के दिमाग में यह संदेह रहा होगा कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हो सकती है।''

सुरजेवाला ने कहा, ‘‘यह कांग्रेस और भाजपा का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह प्रजातंत्र की विश्वसनीयता का प्रश्न है। अगर विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी तो प्रजातंत्र नहीं बचेगा। इसलिए राजनीतिक दलों ने वीवीपैट की कम से कम 50 प्रतिशत पर्चियों की मिलान की बात कही है।'' उन्होंने कहा, ‘‘वीवीपैट पर्चियों के मिलान को एक मतदान केन्द्र से बढ़ाकर पांच केन्द्र किया जाना प्रजातंत्र की मान्यताओं के अनुरूप नहीं है। यह तर्कसंगत नहीं है। उन्हें इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।''

इसे भी पढ़ें :

चुनाव आयोग ने किसी तरह के छापे व कार्रवाई के लिए वित्त मंत्रालय की एजेंसियों को दी नसीहत

Lok Sabha Elections 2019: निजामाबाद इस बार रचेगा इतिहास, जानिए वजह

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने 21 विपक्षी दलों के नेताओं के इस अनुरोध को नहीं माना कि ईवीएम मशीनों से लगी वीवीपैट की कम से कम 50 फीसदी पर्चियों का मिलान किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि ऐसा करने के लिये बहुत अधिक लोगों की आवश्यकता होगी और संगठनात्मक असुविधाओं को ध्यान में रखते हुये ऐसा करना संभव नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि यह फैसला सुनाने वाली पीठ की अध्यक्षता कर रहे उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने भी याचिकाकर्ता 21 विपक्षी दलों की 50 प्रतिशत वीवीपीएटी मशीनों की पर्चियों का मिलान करने की मांग से असहमति जतायी। उन्होंने कहा कि इसके लिये अत्यधिक मात्रा में कर्मचारियों को तैनात करना होगा, जो कि व्यावहारिक नहीं है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने न्यायालय के फैसले को स्वागत योग्य बताते हुये कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया के प्रति मतदाताओं में विश्वास बहाली के प्रयासों को बल मिलेगा। कुरैशी ने 50 फीसदी वीवीपीएटी पर्चियों का ईवीएम के मतों से मिलान करने पर चुनाव परिणाम में देरी होने की आयोग की दलील को गलत बताया।