नई दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि लोग अब केवल नारे नहीं सुनेंगे क्योंकि वे सोशल मीडिया माध्यम के साथ फैसला लेने में सक्षम हैं। 'मन की बात : ए सोशल रिवोल्यूशन ऑन रेडियो' पुस्तक का विमोचन करते हुए उन्होंने कहा कि हाल के वर्षो में सामने आए संचार के नए मंच आगामी वर्षो में जनसंचार के प्रारूप को अकल्पनीय स्तर पर बदल देंगे।

जेटली ने कहा, "आज का भारत और 1960 व 1970 के दशक का भारत अलग है। अब लोग केवल नारे नहीं सुनेंगे। वे तय करने में पर्याप्त रूप से सक्षम हैं।"

उन्होंने कहा, "तय करने के माध्यम से लोग फैसला लेते हैं और यह माध्यम (सोशल मीडिया मंच) ऐसे फैसलों के लिए निशुल्क भी होते हैं।"

न्यूज मीडिया की वर्तमान भूमिका पर तंज कसते हुए जेटली ने कहा, "मीडिया संगठन अब मुद्दों और घटनाओं की रिपोर्टिग की पारंपरिक भूमिका के खिलाफ 'एजेंडा सेटिंग' करने में तब्दील हो गए हैं।"

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अरुण जेटली ने कहा, पुराने समय में रेडियो पर आने वाला समाचार आज की तरह 'वन पॉइंट एजेंडा सेटिंग' न्यूज नहीं होता था। पहले मीडिया देश में घटित होने वाली घटना को रिपोर्ट करता था और एडिटोरियल पेज पर लोग अपने विचार लिखते थे। आजकल का मीडिया देश का एजेंडा सेट करता है।

जेटली ने कहा, रिमोट लेकर ढूंढना पड़ता है कि खबरें कहां हैं। ये समस्या सिर्फ इसी देश में नहीं है। दुनिया के सभी लोकतंत्र में ऐसा ही होता है। आजकल सोशल मीडिया में बिना तथ्यों के कुछ भी कहा जाता है। एयर स्ट्राइक के मामले में भी ऐसा ही हुआ।

एयर स्ट्राइक के बाद लोग बालाकोट ढूंढ रहे थे और सीमा पार के बालाकोट को टारगेट बता रहे थे। प्रिंट मीडिया और रेडियो के लिए ये सुनहरा मौका है कि वो अपनी जगह बनाए।