नई दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज एकबार फिर दोहराया कि पीवी नरसिम्हा राव देश में किए गए अपने दो विशिष्ट आर्थिक रिफॉमर्स के लिए स्वतंत्र भारतीय इतिहास में हमेशा याद किए जाएंगे। देश के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव देश में लाइसेंस परमिट राज को खत्म करने और आयात को उदार बनाने में महती भूमिका निभाई थी।

मनमोहन सिंह ने नरसिम्हा राव को याद करते हुए कहा, ऐसे समय में जब देश को आगे ले जाने के लिए आर्थिक सुधार प्रकिया अपनाने के लिए मजबूत दृढ़ संकल्प और नेतृत्व की आवश्यकता थी, ऐसे में नरसिंह राव ने उनके पीछे मजबूती के साथ खड़े होकर सपोर्ट किया, क्योंकि इसके अभाव में विकास की लंबी छलांग नहीं लगाई जा सकती थी। यह कार्य राव ने एक प्रधान मंत्री के रूप में बखूबी तरीके से कर दिखाया।

महमोहन सिंह नेहरू मोमेंटम म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न प्रणब मुखर्जी से 'पीवी नरसिम्हा राव : नेशनल लीडरशिप एवं लाइफटाइम एचीवमेंट एवार्ड' हासिल करने करने के बाद बोल रहे थे।

मनमोहन सिंह ने नरसिम्हा राव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री सिंह साथ अपने जुड़ाव को याद किया। राव को एक गर्मजोश और महान इंसान के रूप में वर्णित करते हुए, सिंह ने कहा कि उनके समर्थन से ही बड़े महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय लेने में मदद मिली। सिंह ने उस क्षण को भी याद किया कि कैसे नरसिम्हा राव द्वारा आश्चर्यजनक रूप से वित्तमंत्री बनाने के लिए चुना गया था।

सिंह ने उन दिनों को याद करते हुए कहा कि बात उस समय की है जब नरसिम्हाराव जून 1991 में अपनी कैबिनेट का गठन कर रहे थे, तो एक वरिष्ठ अधिकारी पी.सी. अलेक्जेंडर ने उनके पास आए और बताया कि वह वित्तमंत्री के रूप में उनके पहली पसंद बताए जा रहे हैं। इसके वावजूद उन्हें (मनमोहन सिंह को) उस बात पर विश्वास नहीं हुआ। अगले दिन वह अपने कार्यालय यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के कार्यालय चले गए।

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उसी दिन जब शाम को कैबिनेट की शपथ ग्रहण होनी थी, राव ने मनमोहन सिंह खुद को फोन किया और पूछा कि.. क्या अलेक्जेंडर ने उन्हें सूचित किया था या नहीं। तब मनमोहन सिंह ने उन्हें बताया कि उन्हें विश्वास नहीं था कि उन्हें वित्तमंत्री बनाया जा सकता है। इसके बाद जब राव मनमोहन सिंह से मिले तो यह भी कहा था कि अगर वह अच्छा कार्य नहीं पाए तो उन्हें हटादिया जाएगा। इस पर मनमोहन ने कहा था कि यदि केवल प्रधानमंत्री का समर्थन उन्हें मिलेगा तो वह जरूर सफल होंगे।

इस अवसर पर बोलते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि पी.वी. और मनमोहन दोनों को इतिहास में पीढ़ियों के द्वारा आर्थिक सुधारों के लिए याद किया जाएगा और उन्होंने अर्थव्यवस्था को एक ऐसी पटरी पर लाया था, जिसने भारत को आज विश्व आर्थिक शक्ति बना दिया। अर्थशास्त्री और वित्त और वाणिज्य मंत्री के साथ साथ योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में काम कर चुके प्रणब मुखर्जी ने कहा कि आर्थिक सुधारों की बेड़ियों को तोड़ना सिर्फ मनमोहन और पीवी नरसिम्हाराव के ही बस की बात थी।

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इन्हीं दो लोगों ने हिंदू विकास दर, जो 30 सालों से 4 प्रतिशत के नीचे थी, उससे अर्थव्यवस्था को मुक्त किया, बल्कि "समावेशी विकास" के लिए संभव बनाया। प्रणब ने कहा कि उन्होंने 40 वर्षों तक एक दूसरे के साथ विभिन्न शीर्ष स्तरों पर काम किया और उचित राजनीतिक दृष्टि के साथ साथ आर्थिक स्थिरता प्रदान के लिए काम किया।

प्रणब ने यह भी याद किया कि कैसे 12 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान मनमोहन सिंह ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को एक उच्च स्तरीय संस्था बना दिया। इतना ही नहीं, देश में लगभग 1000 विश्वविद्यालय और 40,000 कॉलेजों के लिए किस तरह का काम किया था।