प्रयागराज : कुंभ मेले में एक ओर जहां योगी सरकार कैबिनेट की बैठक करके साधु संतों को लुभाने की कोशिश कर रही है तो वहीं द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राम जन्मभूमि पर भाजपा सरकार की संवेदनशीलता पर ही सवाल उठाया है।

द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने शिलान्यास की तैयारियों को अपने स्तर से तेज करने की पहल शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि प्रयागराज कुम्भ में तीन दिनी धर्म संसद के बाद शंकराचार्य अयोध्या कूच कर राम जन्मभूमि पर शिलान्यास करने का मन बनाया जा रहा है।

ऐसा भी कहा जा रहा है कि द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने चार शिलान्यास के पत्थर मंगा लिए है। नंदा, भद्रा, पूर्णा और जया नाम के ये चारों पत्थर इस वक्त मनकामेश्वर मंदिर में रखे हुए हैं।

द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि हिन्दू धर्म रीति के अनुसार, मंदिर का निर्माण बिना शिलान्यास के नहीं हो सकता है। शिलान्यास के लिए उन्होंने यह पत्थर मंगाए हैं। वास्तु शास्त्र के ग्रंथ सम्रांगण सूत्रधार में इसका उल्लेख है। शिलान्यास चार दिशाओं में होता है इसलिए शिलाएं मंगाई गयी हैं।

इस पहल पर संदेह

द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि अदालत निर्णय दे तो पांच मिनट में मंदिर निर्माण कराएंगे, लेकिन वह कैसे कराएंगे। बतौर मुख्यमंत्री वे धार्मिक निर्माण करा ही नहीं सकते और बतौर संत उनके पास इतना धन भी नहीं है।

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द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि भाजपा सरकार और विश्व हिन्दू परिषद भगवान श्रीराम को मनुष्य मानती है, भगवान नहीं। वह भगवान राम का पुतला तो बना सकती है, लेकिन प्रतिमा स्थापित नहीं कर सकती है।

द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि हमारे धर्म में प्रतिमा में लोहा नहीं लगता। धार्मिक प्रतिमा है। इसलिए अब शंकराचार्य खुद रामजन्म भूमि पर शिलान्यास के लिए पहल करेंगे। धर्म संसद के बाद अयोध्या कूच की तैयारी होगी।

सरकार की मंशा पर सवाल

द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा और राम मंदिर का नाम लेकर जनता अपने झांसे में ले तो लिया पर सरकार बनने के बाद स्वच्छता का दिखावा शुरू हो गया। सरकार गंगा को स्वच्छ करने का संकल्प मानो भूल गई है।

सोमवार को कुंभ मेला परिसर में आयोजित परमधर्म संसद में शंकराचार्य ने कहा कि देवालय से पहले शौचालय को प्राथमिकता दी जा रही है। हर घर में शौचालय बनेगा तो उसकी सफाई के लिए अधिक पानी भी लगेगा। शौचालयों का मल नदी या सरोवर में मिलेगा। ऐसे में यह सोचने का विषय है कि सरकार स्वच्छता के नाम पर क्या कर रही है।

योगी पर साधा निशाना

शंकराचार्य ने कहा कि प्रदेश में संत के मुख्यमंत्री बनने पर लगा था कि कम से कम गो हत्या तो जरूर खत्म हो जाएगा, पर क्या हो रहा है सबको जग जाहिर है। इनके राज में भी वैध व अवैध कत्लखाने चल ही रहे हैं। शंकराचार्य ने कहा कि गाय सिर्फ हिन्दुओं ही नहीं, सभी के लिए उपयोगी है। जो लोग गाय के दूध पर ही निर्भर रहते हैं, उनके बारे में भी सरकार को सोचना होगा। गाय के गोबर में मां लक्ष्मी और गोमूत्र में गंगा निवास करती हैं।