नई दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक बार फिर से ट्रिपल तलाक अध्यादेश बिल को मंजूरी दे दी है। इससे पहले केंद्रीय कैबिनेट ने एक बार में तीन तलाक को अपराध घोषित किए जाने से संबंधित इस अध्यादेश को फिर से जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

पहला अध्यादेश पिछले साल सितंबर में जारी किया गया था, जो 22 जनवरी को समाप्त हो रहा है।लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा में यह बिल रोक दिया गया था, जिसकी वजह से तीन तलाक विरोधी बिल 'द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट' पारित नहीं हो पाने की वजह से मोदी सरकार को दोबारा से यह अध्यादेश लाना पड़ा है।

मोदी सरकार ने पिछले सत्र में तीन तलाक विरोधी बिल को पास कराकर मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक से आजादी दिलाने का बीड़ा उठाया था, लेकिन सफल नहीं हो पाई थी।

NDA सरकार ने इस विधेयक को लोकसभा से तो पास करा लिया गया था, लेकिन राज्यसभा में यह फिर से लटक गया है।

लोकसभा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में बिल को पास कराने के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं है।

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल, 2018 भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (संशोधन) बिल, 2018 और कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2019 लोकसभा में पारित हो चुके हैं। लेकिन राज्यसभा में अटक गए।

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इसलिए कैबिनेट ने गत 10 जनवरी को दोबारा अध्यादेश लाने का फैसला किया। तीन तलाक और आयुर्विज्ञान परिषद पर पिछले साल सितंबर में और कंपनी कानून में संशोधन के लिए पिछले साल नवंबर में अध्यादेश लाया गया था।

आपको बता दें कि अध्यादेश लाने के बाद अगला संसद सत्र शुरू होने के 42 दिन के भीतर उससे जुड़ा बिल संसद के दोनों सदनों में पारित नहीं होने पर अध्यादेश अपने आप रद्द हो जाता है। इसलिए सरकार को तीनों अध्यादेश दोबारा लाने पड़े हैं।