नई दिल्ली : विश्वप्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन विश्व पुस्तक मेले में शनिवार 2 बजे राजकमल प्रकाशन के 'जलसाघर' पर अपनी पुस्तक 'बेशरम' का लोकार्पण के दौरान मौजूद रहेंगी।

बेशरम उपन्यास तसलीमा नसरीन के 1993 में आये 'लज्जा' उपन्यास की उत्तर कथा है तथा राजकमल प्रकाशन द्वारा इसे प्रकाशित किया गया है।

लज्जा उपन्यास के कारण ही बांग्लादेश में कट्टरपंथी समूहों द्वारा लेखिका पर फतवा जारी किया गया था तथा किताब पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था।

लेखिका आज भी निर्वाषित जीवन व्यतीत कर रहीं हैं। इस उपन्यास का बांग्ला भाषा से हिंदी में अनुवाद उत्पल बैनर्जी द्वारा किया गया है।

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लेखिका तसलीमा नसरीन के अनुसार, व्यवस्था की बेशर्मी के विरुद्ध मुखर होती चेतना के आत्मसंघर्ष को रेखांकित करता उपन्यास है 'बेशरम'।

लेखिका तसलीमा नसरीन का बेशरम उपन्यास उन लोगों के बारे में हैं जो अपनी जन्मभूमि को छोड़कर किसी और देश में, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पराये माहौल पर परायी आबोहवा में अपना जीवन बिता रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं कि तसलीमा ने यह जीवन बहुत नजदीक से जिया है।

उनकी विश्वस्तर पर चर्चित पुस्तक लज्जा के लिए उन्हें कट्टरपंथियों ने देशनिकाला दे दिया था। लम्बे समय से वह अपने मुल्क से बाहर हैं।

इस उपन्यास में उन्होंने अपनी जड़ों से उखड़े ऐसे ही जीवन की मार्मिक और विचारोत्तेजक कथा कही है। स्वयं उनका कहना है कि यह उपन्यास लज्जा की तरह राजनीतिक नहीं है, इसका उद्देश्य निर्वासन की सामजिक दुर्घटना और उसकी परिस्थतियों को रेखांकित करना है।