लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हुआ सवर्ण आरक्षण बिल , जानें- किसने क्या कहा

राज्यसभा - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र का आज 18वां दिन है। आज सिर्फ राज्यसभा की ही बैठक। क्योंकि उच्च सदन में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने से जुड़ा 124वां संविधान संशोधन बिल पेश किया गया है। इस बिल को लेकर राज्यसभा में बहस जारी है।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान

रामविलास पासवान ने कहा कि आज जब पिछड़ी जाति का बेटा ऊंची जातियों के लिए आरक्षण की बात कर रहा है तो कांग्रेस के पेट में दर्द हो रहा है. उन्होंने कहा कि इस पूरे 60 फीसदी आरक्षण को संविधान की 9वीं सूची में डाला जाए साथ ही निजी क्षेत्र में भी आरक्षण दिया जाए। उन्होंने सभी सांसदों ने मिलकर इस बिल को सदन से पारित करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को पिछड़ा और दलित विरोध कहा जाता था लेकिन उन्हीं नरेंद्र मोदी की सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में बदलाव करके दिखाया। राम मंदिर पर हल्ला हो रहा था लेकिन प्रधानमंत्री ने सीधे कहा कि मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही मान्य होगा।

टीएमसी सांसद सुखेन्दु शेखर राय

सुखेन्दु शेखर राय ने कहा कि संविधान में कहीं भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि आज सारा देश देख रहा है कि कैसे संविधान संशोधन बिल पास किया जा रहा है। राय ने कहा कि हमें देखना है कि कोर्ट इस बिल को कैसे लेता है।

कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल

इस बिल को लेकर कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि जितनी नौकरियां पैदा हो रही हैं, उससे ज्यादा खत्म की जा रही हैं। हम चाहते थे कि इस बिल के सिलेक्ट कमिटी में भेजा जाता, चर्चा होती और उसके बाद पारित किया जाता। इस बिल को लाने के पहले क्या कोई डेटा जुटाया गया।


उन्होंने कहा कि सरकार के पास 5 साल थे, लेकिन क्यों जल्दी की जा रही है नहीं मालूम। सिब्बल ने कहा कि क्या बिल लाने से पहले सरकार ने कोई डाटा तैयार किया गया है। एक तरफ 2.5 लाख कमाने वाले को इऩकम टैक्स देना पड़ता है और दूसरी ओर आप 8 लाख कमाने वाले को गरीब बता रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद

रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि हमारी सरकार ने महिलाओं को एयरफोर्स का पायलट बनने का अधिकार दिया, राजपथ पर गणतंत्र दिवस के परेड का नेतृत्व का अधिकार दिया। सर्मथन करना है तो खुल कर कीजिए, 'लेकिन' के साथ नहीं।


प्रसाद ने कहा कि आज संसद इतिहास बना रही है और हम सब यहां बैठकर बड़ा बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में हिम्मत है कि वो गरीबों के हर वर्ग की चिंता करती है। बिल देरी से लाने के आरोपों पर कानून मंत्री ने कहा कि क्रिकेट में छक्का स्लॉग ओवरों में लगता है और यह पहला छक्का नहीं है अभी विकास और बदलाव के लिए अन्य छक्के भी आने वाले हैं। संविधान में 50 फीसदी आरक्षण की सीमा का जिक्र नहीं, इस जिक्र सुप्रीम कोर्ट के फैसले में आया।

डीएमके सांसद कनिमोझी

राज्यसभा में डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि बिना किसी कमेटी को भेजे सरकार रातों-रात यह बिल लेकर आई है और अकेले ही सभी फैसले लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि पिछड़ी जातियों को मिला आरक्षण कोई भीख नहीं बल्कि उनका अधिकार है, क्योंकि वो लोग पिछड़ी जातियों में पैदा हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक तौर पर पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने के पीछे आंकड़े क्या है, कितने लोगों को इसका फायदा मिलने जा रहा है, क्या आर्थिक स्तर आरक्षण देने की कोई बुनियाद बन सकता है। डीएमके सांसद ने बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की।

शिवसेना के अनिल देसाई

शिवसेना के अनिल देसाई ने कहा कि शिवसेन इस बिल का समर्थन करती है, हमारे दिवंगत नेता ने इस वक्त इसपर बात की थी, जब कोई इस मुद्दे पर बात करने को तैयार भी नहीं होता था।

उन्होंने कहा कि आने वाले पीढ़ियों को इस बिल से काफी फायदा मिलने वाला है। देसाई ने कहा कि क्या इस बिल का पहले से दिए गए जातिगत आरक्षण पर भी कुछ असर होगा और क्या यह बिल कानूनी पैमाने पर खरा उतर पाएगा, मंत्री को सदन में इस बात का भी जवाब देना चाहिए।

राजद सासंद मनोज झा

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने इस बिल को लेकर कहा कि कैबिनेट से लेकर आखिरी पायदान तक जाति का असर पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर आप सुप्रीम कोर्ट की सीमा तोड़ रहे हैं तो ओबीसी को भी बढ़ाकर आरक्षण दीजिए।

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मनोज झा ने कहा कि इस बिल के जरिए जातिगत आरक्षण को खत्म करने का रास्ता तय हो रहा है। उन्होंने कहा कि कानूनी और संवैधानिक तौर पर यह बिल खारिज होता है। मनोज झा ने कहा कि आरक्षण देना है तो निजी क्षेत्र में भी दीजिए, वहां हाथ लगाने से क्यों डर रहे हैं। आबादी के हिसाब से आरक्षण मिलना चाहिए।

इस दौरन उन्होंने झुनझुना दिखाते हुए कहा कि आमतौर पर ये बजता है लेकिन इस दौर में यह सरकार के पास है जो सिर्फ हिलता है बजता नहीं है।

सीपीआई(एम), इलमारम करीम

इलमारम कीम ने इस बिल की टाइमिंग बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार की 5 राज्यों में हार के बाद की बेचैनी दिखाती है। सरकार की गलत नीतियों की वजह से नौकरियां बढ़ीं नहीं बल्कि घट गई हैं, नोटबंदी के बाद भी रोजगार पर बुरा असर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार में सिर्फ कारोबारियों का विकास हुआ, आम लोगों के जीवन में कोई प्रभावी बदलाव नहीं आ पाया है। यह बिल किसी भी मकसद को पूरा नहीं कर पाएगा और न ही कोर्ट में टिक पाएगा। सरकार भी यह बात जानती है और आगामी चुनाव में जनता आपको संसद से बार निकाल देगी।

टीआरएस सांसद प्रकाश बांडा

प्रकाश बांडा ने अपनी पार्टी की ओर से बिल का समर्थन करते हुए कहा कि पहली बार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण से जुड़ा बिल भी पारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी का आरक्षण भी उनकी आबादी के अनुपात में बढ़ाना चाहिए।

टीडीपी के सांसद वाईएस चौधरी ने

वाईएस चौधरी ने कहा कि यह बिल अच्छा है लेकिन अंतिम वक्त में क्यों लाया गया। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी इस बिल का समर्थन करती है लेकिन इसे बहुत पहले लाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह बिल मददगार साबित होगा. इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए था।

जेडीयू सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह

रामचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि मेरी पार्टी इस बिल का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि अगड़ी जातियों के आरक्षण का श्रेय इस सरकार को जाता है और इसके लिए नरेंद्र मोदी जी को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि आज के इस फैसला का भविष्य में अच्छा नतीजा आने वाला है क्योंकि यह सिर्फ नौकरियों की नहीं बल्कि सोच की बात है।

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