नई दिल्ली : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक फर्जी खबरों और गलत जानकारियों के खतरे से निपटने के लिये स्थानीय विशेषज्ञता और ज्ञान पर ज्यादा ध्यान देगी। कंपनी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

फेसबुक इंडिया की निदेशक (सार्वजनिक नीति) अंखी दास ने कहा कि प्रवर्तन और तकनीकी उपायों की मदद से फर्जी खबरों के प्रचार-प्रसार पर रोक लगायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने म्यांमा और श्रीलंका में फर्जी समाचार और गलत सूचना के कारण भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारने की हिंसक घटनाओं से सबक लिया है।

दास ने यहां रायसीना संवाद 2019 में कहा, "म्यांमा और श्रीलंका में इन समस्याओं से बाहर आने के लिये हमने जो किया उससे अनुभव हासिल किया है। हमने जोखिम वाले देशों में विश्वसनीयता सुनिश्चित करने वाले नेटवर्कों (ट्रस्टेड फ्लैगर्स नेटवर्क) को दोगुना किया है, जहां हिंसा जैसी गतिविधियां हो सकती हैं।"

उन्होंने कहा कि कंपनी ने भारत में व्हॉट्सएप पर संदेश को फॉरवर्ड करने की सीमा को पांच तक सीमित किया है। साथ ही संदेश या सामग्री को वायरल होने से रोकने के लिये किसी भी वीडियो सामग्री की त्वरित (फास्ट) फॉरवर्ड की सुविधा बंद कर दी है।

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फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हॉट्सएप को फर्जी खबरें फैलने के बाद भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं के चलते तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

दास ने कहा, "इसलिये, इन सभी जोखिम वाले देशों में हम समाज के सभी समुदायों और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करते हैं, ताकि हमें इन मुद्दों के बारे में पता रहे। साथ ही सुनिश्चित करते हैं कि हमारी प्रवर्तन टीमों को इसकी जानकारी हो ताकि वे हमारे मंच पर मौजूद इस तरह की सामग्रियों से निपट सके।"

उन्होंने कहा कि कंपनी उद्योग और समाज के सभी समुदायों के साथ चर्चा करके गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए अपने उपायों में सुधार जारी रखेगी।