हैदराबाद : आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस है। हर साल 7 दिसंबर को सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जाता है। सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाने का मुख्य मकसद देश की सेना के प्रति सम्मान प्रकट करना है। उन जांबाज भारतीय सैनिकों के प्रति सम्मान दिखाने का दिन है, जिन्होंने आतंकवादी व उग्रवादी से मुकाबला कर शांति स्थापित करने में अपनी जान न्यौछावर कर दी। इस दिन इन शहीदों और उनके परिवार को नमन किया जाता है।

इस दिन सशस्त्र सेना के शहीदों जवानों के परिवार की मदद के लिए धनाराशि एकत्र की जाती है। यह धनराशि लोगों को गहरे लाल व नीले रंग के झंडे का स्टीकर देकर एकत्रित की जाती है। लोग रुपये देकर इस स्टीकर को खरीदते हैं।

इस जमा राशि को झंडा दिवस कोष में जमा कराई जाती है। जिससे युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवार या घायल सैनिकों के कल्याण व पुनर्वास में सहायता की जाती है। यह राशि सैनिक कल्याण बोर्ड की माध्यम से खर्च की जाती है।

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इसलिए देश के हर नागरिक को चाहिए कि वह झंडा दिवस कोष में अपना योगदान दें, ताकि हमारे देश का झंडा आसमान की ऊंचाइयों को छूता रहे।

23 अगस्त 1947 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की रक्षा समिति ने युद्ध दिग्गजों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए सात दिसंबर को झंडा दिवस मनाने का फैसला लिया। समिति ने तय किया कि यह दिन सैनिकों चाहे वो पैदल सेना के जांबाज हो या फिर नेवी व एयरफोर्स के।

यह उनके प्रति सम्मान प्रदर्शित करने का दिन होगा। इसके बाद सात दिसंबर 1949 से झंडा दिवस की शुरूआत हुई। बाद में वर्ष 1993 से इसे सशस्त्र सेना झंडा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।