पुण्यतिथि विशेष : ‘अम्मा’ ने फिल्मों के बाद राजनीति में ऐसे जमाई अपनी धाक  

जयललिता (फाइल फोटो) - Sakshi Samachar

हैदराबाद : तमिल फिल्मों की सुपर स्टार और तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की आज दूसरी पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 5 दिसंबर 2016 को जयललिता ने चेन्नई के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को कर्नाटक के मैसूर जिले के मेलूकोट शहर में हुआ था।

जयललिता तमिल फिल्मों की सफल अभिनेत्री होने के साथ-साथ उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवाया। जयललिता को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था।

उन्होंने 1961 में 13 साल की उम्र में पहली बार अंग्रेजी फिल्म 'एपीसल' में एक बाल कलाकार के तौर पर सुनहरे पर्दे पर कदम रखा। 1965 में एमजी रामचंद्रन के साथ तमिल फिल्म 'वेनिरा आदाई' में बतौर अभिनेत्री उन्होंने काम किया।

1980 में उन्होंने अपनी अंतिम तमिल फिल्म 'थेड़ी वंधा कादला' में बतौर अभिनेत्री काम किया। रामचंद्रन के मार्गदर्शन में ही उन्होंने 1982 में राजनीति में कदम रखा और अन्नाद्रमुक की सदस्यता ग्रहण की।

जयललिता की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें 1983 में अन्नाद्रमुक की प्रचार टीम का हिस्सा बनाया गया। उन्हें प्रचार प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। पहली बार थिरुचेंदुर सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार भी किया।

कहा जाता है कि जयललिता की लोकप्रियता जैसे-जैसे बढ़ती गई पार्टी प्रमुख रामचंद्रन के साथ उनके रिश्तो में भी दरार बढ़ने लगी। जयललिता को 1984 में पार्टी के कई पदों से हटा दिया गया। 1987 में रामचंद्रन की मृत्यु के बाद अन्नाद्रमुक दो टुकड़ों में बंट गई।

1988 में रामचंद्रन की पत्नी जानकी तमिलनाडु की मुख्यमंत्री तो बनीं, सिर्फ 21 दिनों के लिए। जानकी के हटते ही प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया।

राष्ट्रपति शासन हटने के बाद राज्य में चुनाव हुआ, जिसमें करुणानीधि की पार्टी डीएमके को भारी जीत मिली। इस हार के बाद जानकी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद जयललिता का रास्ता साफ हो गया।

1991 में जयललिता पहली बार बनीं लेकिन आय से अधिक संपत्ति मामले में वह जेल चली गईं। इसी साल 1991 विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक और कांग्रेस के गठबंधन ने डीएमके को करारी शिकस्त दी। पहली बार जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं।

1996 में बतौर मुख्यमंत्री पांच साल पूरा करने के बाद जयललिता चुनाव की तैयारी में थी। इसी दौरान उन पर और उनकी सहयोगी शशिकला पर आय से अधिक संपत्ति मामले में 48 केस दर्ज हुए और उन्हें जेल जाना पड़ा।

पांच सालों तक सत्ता से दूर रहीं जयललिता अपनी पार्टी के जीत के बावजूद 2001 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने में असफल रहीं। अन्नाद्रमुक ने निर्विरोध तौर पर उन्हें अपना अपना नेता तो चुना, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता को दोबारा मुख्यमंत्री बनने से रोक दिया।

कोर्ट के आदेश के बाद एआईडीएमके के विधायकों ने जयललिता के करीबी पन्नीर सेल्वम को सदन में अपना नेता चुना और वो मुख्यमंत्री बने। 2003 में जब कोर्ट ने जयललिता को चुनाव लड़ने की इजाजत दी तो उन्होंने अंदीपट्टी सीट से चुनाव लड़ा और दूसरी बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने में सफल रहीं।

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2006 में हुए विधानसभा चुनाव में डीएमके गठबंधन चुनाव से मिली हार के बाद 'अम्मा' को 2011 तक विपक्ष के नेता के तौर पर रहना पड़ा। 2011 में जब पुन: विधानसभा चुनाव हुआ तो अन्नाद्रमुक राज्य में जीत दर्ज करने में सफल रही और जयललिता फिर से मुख्यमंत्री चुनी गईं।

तीसरी बार तमिलनाडु की सत्ता संभालने के 3 साल बाद ही 2014 में आय से अधिक की संपत्ति मामले में जयललिता पर 4 साल के लिए जेल की सजा के साथ 100 करोड़ रुपए जुर्माना लगाया गया। कोर्ट के आदेश के बाद जयललिता को हिरासत में लिया गया।

29 सितंबर 2014 को 'अम्मा' के सहयोगी पन्नीर सेल्वम ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। जयललिता ज्यादा दिनों तक सत्ता से दूर नहीं रही और कोर्ट से निर्दोष साबित होने के बाद 22 मई 2015 को फिर से मुख्यमंत्री बन गईं।

दो महीने से अधिक समय तक बीमार रही जयललिता को 4 दिसंबर को कार्डियेक अटैक हुआ था। 5 दिसंबर 2016 को चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।


बता दें कि जयललिता को गहने, कपड़ों, जूतों का काफी शौक था। बताया जाता है कि 1996 में जब उनके घर आयकर विभाग का छापा पड़ा था तो उनके घर में अथाह दौलत देखकर अधिकारी दंग रह गए थे।

उस समय जयललिता के घर से करीब 896 किलो चांदी, 28 किलो सोना, 10,000 से ज्यादा साडिय़ां, 51 महंगी घडिय़ां और 750 जूते बरामद किए गए थे। जयललिता को साडि़यों का तो शौक था पर वे मेकअप कभी नहीं करती थीं।

इसके अलावा जयललिता को अंग्रेजी अखबार पढ़ने का बहुत था। वह हर रोज करीब पांच अंग्रेजी अखबर पढ़ती थीं।


जयललिता की पुण्यतिथि के अवसर पर अन्नाद्रमुक के प्रमुख नेताओं पनीरसेल्वम और के पलानीस्वामी समेत पार्टी के अन्य नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जयललिता को मरीना बीच पर दफनाया गया था।

पनीरसेल्वम और पलानीस्वामी ने अन्ना सलाई से मरीना बीच तक मौन मार्च किया। उनके साथ मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य, सांसद और विधायक भी मार्च में शामिल हुए। सभी ने काले रंग के वस्त्र पहन रखे थे। पलानीस्वामी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जबकि पनीरसेल्वम उप मुख्यमंत्री हैं।

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