SC ने जेलों की क्षमता से अधिक कैदी होने पर जताई चिंता, 67 फीसदी हैं विचाराधीन कैदी

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नई दिल्ली : देश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी और इनमें भी 67 फीसदी तक विचाराधीन कैदी होने पर चिंता व्यक्त करते हुये उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उनके मुकदमों के तेजी से निबटारे के लिये तत्काल कदम उठाने पर जोर दिया।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने विचाराधीन कैदियों के मामलों की समीक्षा करने वाली समिति को 2019 के पहले छह महीनों में हर महीने बैठक करने और विचाराधीन कैदियों के मामले की समीक्षा करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि इस संबंध में यह समिति अपनी रिपोर्ट राज्यों में विधिक सेवा प्राधिकरणों को सौंपे। प्रत्येक जिले में गठित यह समिति विचाधीन कैदियों के मामलों पर विचार करके उनकी रिहाई और ऐसे कैदी जो सजा पूरी कर चुके हैं या जमानता अथवा सजा में छूट पाने के हकदार हैं, उन्हें इसका लाभ देने की सिफारिश करती है।

पीठ ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण् द्वारा उपलब्ध कराये गये इन आंकड़ों का संज्ञान लिया कि पिछले साल 31 दिसंबर तक देश में जेलों की क्षमता करीब 3.78 लाख कैदियों की थी जबकि इनमें वास्तव में 4.19 लाख कैदी बंद थे।

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पीठ ने कहा कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण विचाराधीन कैदी समीक्षा समितियों से मिलने वाले आंकड़ों को संकलित करेगी और अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण को सौंपेगी। शीर्ष अदालत देश की 1382 जेलों में अमानवीय स्थिति से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी।

यही पीठ विचाराधीन कैदियों के मुकदमों की तेजी से सुनवाई के लिये दायर एक अन्य मामले की भी सुनवाई कर रही है।

पीठ ने कहा कि नालसा के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड जैसे राज्यों की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने की समस्या अधिक गंभीर है।

पीठ ने कहा, ‘‘हमें यह बताया गया है कि कैदियों की आबादी में 67 प्रतिशत विचाराधीन हैं और यह संख्या बहुत ही ज्यादा है।''

न्यायालय ने देश की जेलों में सुधार के बारे में विचार करने और जेलेां में क्षमता से अधिक कैदियों सहित इसके विभिन्न पहलुओं के बारे में सिफारिशें करने के लिये 25 सितंबर को शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश अमिताव राय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।

न्यायालय ने कहा था कि पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो के महानिरीक्षक और दिल्ली की तिहाड़ जेल के महानिदेशक समिति के सदस्य होंगे।

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