हैदराबाद : आज विश्व एड्स दिवस है। हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने का अहम मकसद एचआईवी संक्रमण की वजह से होने वाली बीमारी एड्स के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। साथ ही इस बीमारी से जिसकी मौत हो गई है उनका शोक मनना है। विश्व एड्स दिवस साल 1988 के बाद से हर साल 1 दिसंबर को मनाया जाता है।

साल 2018 में विश्व एड्स दिवस की थीम 'अपनी स्थिति जानें' है। इसका मतलब यह है कि हर इंसान को अपने एचआईवी स्टेटस की जानकारी होनी चाहिए।

मौजूदा वक्त में एड्स सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 36.9 मिलियन लोग एचआईवी के शिकार हो चुके हैं। भारत सरकार द्वारा जारी किए गए आकड़ों के अनुसार भारत में एचआईवी के रोगियों की संख्या लगभग 2.1 मिलियन है।

आपको बताते चलें कि साल 1987 में 'थॉमस नेट्टर' और 'जेम्स डेव्लयू' बन्न द्वारा विश्व एड्स दिवस की पहली बार कल्पना की गई थी। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने साल 1995 में विश्व एड्स दिवस की घोषणा थी, जिसे अन्य देशों द्वारा अनुकरण किया गया। लेकिन 1996 में यह पूरी दुनिया के प्रभाव में आया।

एड्स के शुरुआती लक्ष्ण :

- अधिक समय तक सूखी खांसी आना

- ग्रंथियों में सूजन

- बार – बार फंगल इंफैक्शन होना

- रात को पसीना आना

- याददाश्त कम होना

- भूख कम लगना

-वजन घटना

-उल्टी आना

-सांस लेने में समस्‍या

-शरीर पर चकत्ते होना

-स्किन प्रॉब्‍लम

इन कारणों से होता हैं एड्स :

-असुरक्षित यौन संबंध बनाना

-संक्रमित खून चढ़ाने से

-एचआईवी पॉजिटिव महिला के बच्चे में

-एक बार इस्तेमाल की जानी वाली सुई को दूसरी बार यूज करने से

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वहीं अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही 15 साल पहले शुरू हुए एचआईवी/एड्स सहायता कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए एक बिल पर हस्ताक्षर करेंगे। पेंस ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में आगामी विश्व एड्स दिवस को चिह्न्ति करने के लिए आयोजित समारोह में गुरुवार को यह घोषणा की।

सीनेट ने बुधवार को प्रेसीडेंट्स इमरजेंसी प्लान फॉर एड्स रिलीफ (पीईपीएफएआर) के लिए राष्ट्रपति की आपातकालीन योजना को पांच साल तक बढ़ाने वाले एक बिल को मंजूरी दी और इसे ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस भेजा।

सदन ने इस महीने के शुरू में इसी तरह का एक बिल पारित किया था। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने पीईपीएफएआर को कानून बनाने के लिए 2003 में इस पर हस्ताक्षर किए थे।