हैदराबाद : उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने लोगों द्वारा अपने माता-पिता को छोड़ने पर चिंता जताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि बुजुर्गों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार ‘‘घृणास्पद और पूरी तरह से अस्वीकार्य है।''

उन्होंने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और कल्याण अधिनियम 2007 के बावजूद बच्चों के (देश में) अपने बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ने के मामलों में वृद्धि हुई है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘‘हमारी सभ्यता को हमेशा बुजुर्गों के साथ किये जाने वाले व्यवहार के तरीके पर गर्व रहा है।'' उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की देखभाल करना युवाओं का कर्तव्य हैं।

उन्होंने यहां अखिल भारतीय वरिष्ठ नागरिकों के परिसंघ (एआईएससीसीओएन) द्वारा आयोजित वरिष्ठ नागरिकों के 18वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा कि भारत में परंपरागत रूप से एक मजबूत संयुक्त परिवार व्यवस्था होती थी और तेजी से बदलती सामाजिक-आर्थिक स्थितियां इसके विघटन का कारण बन रही हैं।

इसे भी पढ़ें :

TDP नेता NTR का यह दांव, जिसने पक्की कर दी थी कांग्रेस की हार वेंकैया नायडू की जीत

नायडू ने कहा, ‘‘बुजुर्गों की रक्षा करने में जब भी परिवार व्यवस्था विफल होती है तो इस शून्य को भरने के लिए समुदाय, नागरिक समाज और सरकार को कदम उठाने पड़ते है।''

उन्होंने कहा कि इस समय देश में अनुमानित 10.5 करोड़ बुजुर्ग हैं और यह संख्या 2050 तक 32.4 करोड़ तक पहुंच जायेगी। उपराष्ट्रपति ने बुजुर्गों को शारीरिक, वित्तीय तथा सामाजिक सुरक्षा और सम्मान दिये जाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी राज्य सरकारों को बुजुर्ग लोगों से संबंधित राष्‍ट्रीय नीति को पूरी भावना के साथ लागू करना चाहिए।