नई दिल्ली : दिवाली के मौके पर दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जमकर धज्जियां उड़ीं। जिसके कारण दिल्ली की हवा और जहरीली हो गयी है। बताया जा रहा है कि कल से लोगों को सांस लेने में भी काफी परेशानी हो रही है। हालांकि आज हवा में कुछ सुधार हुआ है।

दीवाली के बाद दिल्ली का प्रदूषण स्तर पिछले साल की तुलना में करीब दो गुना रहा। गुरुवार को को एक्यूआई 642 के आंकड़े पर दर्ज किया गया जबकि साल 2017 में (दीवाली के अगले दिन) एक्यूआई 367 पर जबकि 2016 में 425 पर दर्ज किया गया था।

आज की बात करें तो एक्यूआई आरके पुरम में 368, आनंद विहार में 995, पंजाबी बाग में 496, मंदिर मार्ग पर 474, शहादरा में 635, द्वारका में 401, सोनिया विहार में 370, वजीरपुर में 541 और फरीदाबाद में 406 रहा।

दिल्ली की एक्यूआई
दिल्ली की एक्यूआई

वायु गुणवत्ता के इस श्रेणी में पहुंचने का मतलब यह है कि इस जहरीली हवा में ज्यादा देर तक रहने से स्वस्थ लोगों को भी सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। यह हवा बीमार व्यक्तियों को और भी प्रभावित करेगी।

शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’ माना जाता है, 51 और 100 के बीच इसे ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’ माना जाता है, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘काफी खराब’ और 401 और 500 के बीच इसे ‘अत्यंत गंभीर’ माना जाता है।

दिवाली के बाद पहली सुबह में देश के कई भागों में जहरीली धुंध छाई रही और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तथा एनसीआर में प्रदूषण ‘‘गंभीर ’’ स्तर को पार कर ‘‘बेहद गंभीर और ‘‘आपात ’’स्तर तक पहुंच गया।

दिल्ली में धूंध
दिल्ली में धूंध

केंद्र द्वारा संचालित सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक, पटाखों से पैदा हुए धुएं सहित अन्य कारणों से दिल्ली में समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 642 तक पहुंचा जो ‘‘अत्यंत गंभीर और आपातकालीन’’ श्रेणी में आता है।

‘सफर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता अगले दो दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में रहने का अनुमान है क्योंकि पटाखों से निकले धुएं ने प्रदूषकों के छितराने की प्रक्रिया धीमी कर दी है।

दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने गुरुवार को रात 11 बजे से 11 नवंबर को रात 11 बजे तक शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकार ने कहा कि वह स्थिति पर गौर कर रहा है और अगर प्रदूषण का स्तर बढ़ता है तो आपातकालीन उपाय किये जाएंगे। इन उपायों में निजी वाहनों के लिए ‘सम-विषम’ योजना शामिल है।