‘वोट की स्याही दिखी तो काट देंगे उंगली’, छत्तीसगढ़  चुनाव में नक्सलियों की धमकी से ऐसे निबटेगा चुनाव आयोग

कॉंसेप्ट फोटो - Sakshi Samachar

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुानव के पहले चरण का मतदान 12 नवंबर को होगा। पहले चरण में 18 सीटों के लिए वोटिंग होगी। यह सीटें नक्सल प्रभावित सीटें मानी जाती है। इसमें बस्तर दंतेवाड़ा, बीजापुर तथा सुकमा और राजनांदगांव है। बस्तर की गिनती देश के सबसे बड़े नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में होती है।

बस्तर की 12 सीटों में से अधिकांश अति संवेदनशील श्रेणी की हैं। यहां नक्सलवाद विकास के आड़े आता रहा है। जगदलपुर बस्तर संभाग की सर्वाधिक शहरी आबादी वाली सीट है। इस सीट के भी कुछ गांव ऐसे हैं जहां पैदल चलकर ही जाया जा सकता है।

ऐसे में इन विधानसभा सीटों पर चुनाव आयोग की शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव करवाना किसी चुनौती से कम नहीं है। अभी हाल ही बीजापुर और दंतेवाड़ा में नक्सली वारदात सामने आयी है।

हाल ही में बीजापुर में चार जवान शहीद हुए थे। जबकि दंतेवाड़ा में दो जवान और मीडियाकर्मी शहीद हो गये थे। भले ही नक्सलियों ने मीडियाकर्मी की मौत पर दुख जताया हो लेकिन कई जगहों पर चुनाव बहिष्कार की बातें भी उनकी ही तरफ से उठती रही हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब नक्सलियों ने चुनाव का बहिष्कार किया हो। इससे पहले भी नक्सली चुनाव का बहिष्कार करते आये हैं। नक्सली ज्यादातर सत्ता पक्ष का बहिष्कार करते हैं। क्योंकि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हैं।

बस्तर इलाके में नक्सली पोस्टरों और मीटिंग के जरिए चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा का बहिष्कार करने को कह रहे हैं। नक्सलियों ने दूर-दराज के जंगलों में लगे इन पोस्टरों पर लिखा है, 'बायकॉट फेक छत्तीसगढ़ चुनाव'।

यहां यह भी चर्चा है कि उग्रवादियों ने गांववालों को धमकी दी है कि अगर उनके हाथ की उंगली में स्याही का निशान लगा होगा जिसका मतलब वह वोट देकर आए हैं तो उनके हाथ काट दिए जाएंगे।

वहीं दूसरा पोस्टर में ग्रामीणों से कहा गया है कि कि 'कॉर्पोरेट ऐंड हिंदू फासिस्ट' भाजपा का बहिष्कार करो और दूसरी राजनीतिक पार्टियों को जन अदालत में खड़ा करो। इन पोस्टरों को सीपीआई (माओवादी) ने जारी किया है।

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सीपीआई के एक दूसरे पोस्टर में लिखा है- 'फर्जी छत्तीसगढ़ विधानसभा का चुनाव का बहिष्कार करो। जनता सरकार को मजबूत करेंगे, उनका विस्तार करेंगे, जनयुद्ध को तेज करके, दमन योजना समाधान को हराएंगे।'

सुरक्षा को देखते हुए चुानव आयोग ने भी नक्सल प्रभावित इलाके में चुनाव के पहले चरण के लिए केंद्रीय और राज्य पुलिस बलों के करीब 65,000 जवानों की तैनाती करने का फैसला लिया है। बस्त आईजी ने लोगों को आश्वासन तो दिया है कि सुरक्षा के पुुख्ता इंतेजाम किया जाएगा। शांतिपूर्ण चुनाव के लिए हर एक वोटर के पीछे एक जवान रखने की बात कही है। अब आने वाला समय ही बता पाएगा कि सुरक्षा के कितने इंतेजाम है।

दरअसल, चुनाव के नजदीक आते ही नक्सली अपना पैठ जंगलों में बनाना शुरू कर देते है। बारुदी सुरंगों के द्वारा वह जवानों को रोकते है। आने वाले कई दसको से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद एक बड़ी समस्या रही है।

लेकिन राहत की बात यह है कि 2013 के विधानसभा चुनाव के तो इन 18 सीटों पर 67 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इससे पहले भी 2008 में इन सीटों पर वोटिंग 66 फीसदी रहा था। अब देखते हैं इस साल कितना प्रतिशत मतदान होता है।

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