नई दिल्ली: एनडी तिवारी का जन्म 18 अक्तूबर, 1925 को नैनीताल के बलूती गांव में हुआ था। इसे संयोग ही कहें कि आज 18 अक्टूबर को ही उनका निधन हो गया है। एनडी तिवारी ने आजादी के समय इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र नेता के तौर पर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। एनडी तिवारी संभवतः देश के इकलौते बड़े नेता थे जो भारत के गणराज्‍य बनने के समय से ही राजनीति में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सक्रिय थे।

यूपी उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आंध्रप्रदेश के पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी के निधन से देश शोकाकुल है। इसमें कोई दो राय नहीं की नारायण दत्त तिवारी देश के कद्दावर नेता थे। कांग्रेस पार्टी और बीजेपी में उनका बेहद सम्मान रहा है। सियासी वजहों से दोनों पार्टियों ने उनसे कुछ हद तक परहेज करना शुरू कर दिया था। हम आपको बताते हैं एनडी तिवारी के बारे में वो जानकारियां, जिसके जलते उन्हें जिंदगी के ढलान में कई जिल्लत झेलने पड़े।

एनडी तिवारी सेक्स सीडी कांड

गृह मंत्रालय में एक रिपोर्ट आई थी कि किसी राज्य के राजभवन में महिला कर्मचारियों को यौन संबंध बनाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। शिकायत सीधे गवर्नर के खिलाफ थी लिहाजा हड़कंप मचा था। गृह मंत्रालय इस मामले में जांच करवा ही रहा था कि निजी चैनल ने एनडी तिवारी का सेक्स सीडी प्रसारित कर दिया।

चैनलों पर दिखाई गई सीडी के मुताबिक एनडी तिवारी तीन युवा लड़कियों से मसाज करवाते पाए गए। मामला चूंकि राजभवन का था लिहाजा इसे बेहद संवेदनशील माना गया। एनडी तिवारी ने इस मामले में सफाई दी और वीडियो को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने दलील दी कि इस तरह के वीडियो हैदराबाद स्थित रामोजी फिल्म सिटी में उन्हें बदनाम करने की नीयत से तैयार कराए गए हैं। हालांकि सीडी की जांच के बाद इसे सही पाया गया तो एनडी तिवारी को पद छोड़ना पड़ा था।

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सीडी कांड के बाद एनडी तिवारी उत्तराखंड लौट आए और अपनी सियासी जमीन तलाशनी शुरू कर दी। विवादों की वजह से लंबे समय तक कोई भी पार्टी एनडी तिवारी को भाव नहीं दी। तिवारी को शायद इसका गुमान भी नहीं होगा कि जवानी के दिनों में उनकी रंगीन मिजाजी बुढ़ापे में उनका करियर लील लेगा।

एनडी तिवारी और पुत्र रोहित का मामला

एनडी तिवारी पर एक बुजुर्ग महिला ने आरोप लगाया कि वे महिला के बेटे के जैविक पता हैं। मामला कोर्ट में चला गया और कोर्ट के आदेश के बाद तिवारी का डीएनए टेस्ट कराया गया। शुरुआती नानुकुर के बाद एनडी तिवारी ने बेटे रोहित को अपना लिया और उसे अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया। इस संबंध को मान्यता देते हुए तिवारी ने मई 2014 में रोहित की मां उज्जवला शर्मा से विधिवत विवाह भी कर लिया। तब एनडी तिवारी की उम्र नब्बे साल की थी।

सियासत गलियारे में बड़ा चेहरा थे एनडी तिवारी

साल 1990 में राजीव गांधी के निधन के बाद एनडी तिवारी प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जाते थे। हालांकि पीवी नरसिम्हा राव ने तब बाजी मार ली थी। हालांकि तब भी तिवारी का दबदबा कम नहीं था। कांग्रेस में रहते हुए दूसरी पार्टियां भी उनका कहा नहीं टालती थी।