यौन शोषण आरोपों पर अकबर ने खोला मुंह, इस तरह बचाने की शुरू हुई मुहिम

एम जे अकबर: फाइल फोटो - Sakshi Samachar

नई दिल्ली: पूर्व पत्रकार और वर्तमान केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री के रविवार भारत लौटने पर बड़ी कार्रवाई या इस्तीफे की उम्मीद की जा रही थी। पहले तो अकबर ने मीडिया को टालने की कोशिश की। वहीं घात लगाए मीडिया से बचाव की उम्मीद नजर नहीं आई तो अब उन्होंने ताजा बयान दिया है।

एम जे अकबर के मुताबिक उनके खिलाफ महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न का आरोप पूरी तरह सियासी एजेंडा है। अकबर ने तो यहां तक कहा कि चुनाव से पहले इस तरह की बातें होनी आम हैँ।

एमजे अकबर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया है। यहां तक कि अब आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों को ही अकबर आंख दिखाने लगे हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा है कि वे इस मामले में कानूनी कार्रवाई करेंगे।

हालांकि #MeToo कैम्पेन के तहत एमजे अकबर के खिलाफ जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं उसे नैतिकता के तराजू पर ही तोला जा रहा है। भारतीय राजनीति में कई ऐसे मौके आए जब नेताओं पर आरोप लगते ही नैतिक मापदंडों को स्थापित करने के लिए इस्तीफा दिया गया या फिर बर्खास्त किया गया।

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मौजूदा राजनीतिक माहौल में ये संभव नहीं लगता। यही नहीं सोशल मीडिया में अकबर के समर्थन गोलबंदी भी शुरू हो गई है। जिसके तहत #MeToo में आरोप लगाने वाली महिलाओं को ही बुरा भला कहा जा रहा है। यहां तक कि उन्हें बूढ़ी हो रहीं वेश्याएं तक कहने से भी गुरेज नहीं किया जा रहा।

आरोप लगाने वाली महिलाओं की तुलना ताड़का, पूतना और सूर्पनखा से हो रही है। साथ ही ये दलील दी जा रही है बीते 13 सालों के दरम्यान जब तक अकबर बीजेपी के कटु आलोचक रहे तब तक उनपर आरोप नहीं लगाए गए। ये सब तो बीजेपी और पीएम मोदी को बदनाम करने के तहत की गई साजिश है।

एम जे अकबर के अलावा नाना पाटेकर और विवेक अग्निहोत्री की भी तरफदारी की जा रही है। वायरल पोस्ट के मुताबिक नाना पाटेकर चूंकि वामपंथियों के धुर विरोधी हैं इसलिए उन्हें फंसाया जा रहा है।

कुल मिलाकर #MeToo कैम्पेन को चुनावी माहौल में सियासी चश्मे से देखा जा रहा है। वायरल पोस्ट को आकर्षक तरीके से लिखा गया है कि लोग उसकी दलीलों पर यकीन भी करने लगे हैं।

साथ ही सोशल मीडिया में सलाह दी जा रही है कि #MeToo की ही तरह पुरुषों के लिए #YouToo या फिर #WeToo जैसे कैम्पेन चलाने की जरूरत है। ताकि पुरुष भी अपना पक्ष रख सकें। अब देखना है लोगों का रुख क्या होता है। साथ ही अकबर की राजनीति और प्रतिष्ठा किस अंजाम तक पहुंचती है।

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