हैदराबाद : उपराष्ट्रपति एम. वेंकय्या नायडू ने कहा कि नवोन्मेष अब कोई ‘विलासिता' नहीं बल्कि भारत जैसे देश के लिए एक जरूरत है। उन्होंने कहा कि एनआईटी जैसे संस्थानों को नवोन्मेष पर बड़े पैमाने पर ध्यान देना चाहिए।

नायडू ने सोमवार को तेलंगाना के वरंगल में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के हीरक जयंती समारोह के उद्घाटन के बाद प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक शोधों को बढ़ावा देने के प्रयासों लिए संस्थान की सराहना की। उप राष्ट्रपति ने जोर दिया कि एनआईटी जैसे प्रौद्योगिकी संस्थानों को बड़े पैमाने पर नवोन्मेष पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि नवोन्मेष एक मंत्र होना चाहिए जो संस्थान को आगे ले जाता है। उप राष्ट्रपति के हवाले से एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश के लिए नवोन्मेष अब कोई ‘विलासिता' नहीं है बल्कि तत्काल आवश्यकता की चीज है।

2025 तक पांच खरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की देश की प्रतिबद्धता पर ध्यान दिलाते हुये उन्होंने कहा भारत की प्रगति की कहानी से दुनिया अचंभित है और कई विदेशी व्यवसाय देश में निवेश करने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि विकास को सतत बनाने के लिए ‘नवोन्मेष तेज' करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘नवोन्मेष आगामी 20 वर्षों को ध्यान में रख कर करना चाहिए और यह स्वच्छ और हरित भी होना चाहिए।'' नायडू ने कहा, ‘‘नवोन्मेष से भ्रष्टाचार और सब्सिडी की चोरी से लड़ने में मदद मिलेगी। नवोन्मेष के जरिये हमारे समय की बड़ी समस्याओं से कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से पार पाया जा सकता है।''

उप राष्ट्रपति ने कहा कि जब देश लाल फीताशाही हटाने तथा दुनिया का गर्मजोशी से स्वागत करने को तैयार है तो इसे सरलता पर ध्यान केन्द्रित करना होगा और प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना पड़ेगा। नायडू ने एनआईटी जैसे संस्थानों को अपने पूर्व छात्रों के साथ-साथ उद्योग से संबंध बनाने के लिए कहा।