इंदौर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के 53वें धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के साथ एक इस्लामिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान मोदी नंगे पांव सैफी मस्जिद पहुंचे और वहां मजलिस में शरीक हुए।

हज़रत इमाम हुसैन की शहादत पर 'अशरा मुबारका' में उपस्थित लोगों को प्रधानमंत्री ने संबोधित भी किया। इस दौरान बोहरा समुदाय के धर्मगुरु सैयदना ने मोदी को ताबीज देकर शॉल ओढ़ाया।

हुसैन के गम में पढ़े जाने वाली मरसिया को मोदी बड़े गौर से सुनते रहे और मातम में शरीक हुए। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इमाम हुसैन शांति और इंसाफ के लिए शहीद हो गए।

अब हम आपको सात साल पुराने नरेंद्र मोदी के पास लिए चलते हैं। तब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। साल 2011 में दंगों के बाद सामाजिक सद्भावना को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसमें एक मौलाना ने मोदी को इस्लामी टोपी पहनानी चाही। जिसे पहनने से मोदी ने इनकार कर दिया था। जिसकी आम लोगों के बीच खूब चर्चा हुई थी।

इस घटना के बाद मोदी की एक वर्म में जबरदस्त आलोचना की गई थी। हालांकि दो साल बाद भारी बहुमत हासिल करने वाले नरेंद्र मोदी ने केंद्र में सरकार बनाई और साबित किया कि उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं हुई है।