नई दिल्ली: सहारनपुर जातीय हिंसा घटना का मुख्य आरोपी और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण को सरकार ने रिहा करने का फैसला किया है।

बता दें कि सरकार ने भीम आर्मी के संस्थापक रावण को रासुका के तहत जेल में बंद किया है। समयपूर्व चंद्रशेखर की रिहाई का सरकार ने फैसला लिया है।

दरअसल चंद्रशेखर उर्फ रावण दलितों के हितों की बात करते हैं। उनके जेल में रहते हुए दलित वोट खिसक न जाय, लिहाजा सरकार दबाव में आकर उनकी रिहाई का फैसला कर रही है। इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

सरकार के इस फैसले से लगता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में भीम आर्मी और चंद्रशेखर उर्फ रावण की प्रभावी भूमिका हो सकती है।

सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक रावण की मां की तरफ से रिहाई के लिए गुहार लगाई गई थी। जिसपर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए सरकार ने रिहाई का फैसला किया है।

तय मियाद के हिसाब से रावण को एक नवंबर तक जेल में रहना था। जबकि सरकार जल्दी ही उन्हें रिहा करने वाली है।

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जानकारी के मुताबिक रावण के दो सहयोगियों सोनू शिवकुमार की रिहाई का भी सरकार ने आदेश दिया है। इस बारे में सहारनपुर के डीएम को सरकारी आदेश जारी कर दिया गया है।

बता दें कि सहारनपुर में जातीय हिंसा के लिए सरकार ने चंद्रशेखर उर्फ रावण को जिम्मेदार ठहराया था। जिसके बाद उसके और कुछ अन्य सहयोगियों को रासुका के तहत जेल में बंद कर दिया।