किसानों के आएंगे अच्छे दिन! न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने पर सरकार का विचार

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाजार में दाम गिरने की स्थिति में किसानों को उनकी उपज के लिये तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित कराने के लिये प्रस्तावित नई खरीद प्रणाली के वित्तीय प्रभावों को लेकर मंगलवार को विचार-विमर्श किया।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 के बजट भाषण में घोषणा की थी कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ परामर्श कर नीति आयोग एक बेहतर प्रणाली स्थापित करेगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का पूरा लाभ मिले।

सूत्रों के अनुसार, नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तावित खरीद तंत्र और इसके वित्तीय निहितार्थ पर प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुति दी। नीति आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि राज्यों को तीन मॉडलों का विकल्प दिया जाना चाहिए- बाजार आश्वासन योजना (एमएएस), मूल्य अंतर खरीद योजना (पीडीपीएस) और निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट योजना।

सूत्रों ने कहा कि चावल और गेहूं को छोड़कर अन्य सभी फसलों के दाम एमएसपी से नीचे जाने की स्थिति में किसानों को क्षतिपूर्ति करने के लिए सालाना 12,000-15,000 करोड़ रुपये का बोझ वहन करना पड़ सकता है। चावल और गेहूं की पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी एजेंसियां खरीद करती हैं।

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सूत्रों ने बताया कि सरकार इन योजनाओं को अंतिम रूप देना चाहती है और खरीफ फसलों की कटाई से पहले इसकी घोषणा कर सकती है जो अक्टूबर से शुरू होती है। सरकार ने बजट में घोषणा की थी कि 14 अधिसूचित खरीफ फसलों के एमएसपी को उत्पादन लागत से कम से कम 1.5 गुना अधिक तय किया जाएगा।

चूंकि एफसीआई सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से वितरण के लिए केवल गेहूं और चावल खरीदता है, इसलिए सरकार एक नई व्यवस्था स्थापित करना चाहती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अन्य फसलों के एमएसपी में वृद्धि का लाभ भी किसानों तक पहुंचना सुनिश्चित हो सके।

नीति आयोग के प्रस्ताव के अनुसार बाजार आश्वासन योजना (एमएएस) राज्य सरकारों द्वारा लागू की जायेगी जो स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बाजार में प्रवेश करेंगे और राज्यों द्वारा अधिकृत अपनी निजी एजेंसियों या किसी अन्य निजी एजेंसी के माध्यम से खरीद करेंगे।

दूसरी तरफ, मूल्य कमी खरीद योजना को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई भावानंतर भुगतान योजना के समान ही बनाया गया है। इस योजना के तहत, यदि बिक्री मूल्य मॉडल कीमत से कम है, तो किसानों को कुछ शर्तों और सीमाओं के साथ एमएसपी और वास्तविक मूल्य के बीच अंतर का मुआवजा दिया जाएगा।

नीति आयोग ने एक पारदर्शी ई - मार्केट प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से एमएसपी- सम्बद्ध खरीद के मामले में निजी क्षेत्र की भागीदारी का प्रस्ताव भी दिया है। सूत्रों ने बताया कि जब एमएसपी के नीचे कीमतें गिरती हैं तो राज्यों को कृषि उपज की खरीद के लिए पारदर्शी बोली- प्रक्रिया के माध्यम से निजी फर्मों को सूचीबद्ध (इम्पैनल) करने की अनुमति होगी। उन्होंने बताया कि निजी फर्मों को कर प्रोत्साहन और कमीशन दिया जाएगा।

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