क्या बिहार में PK बिगाड़ पाएंगे राजनीतिक सूरमाओं का खेल !

रणनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर (फाइल फोटो) - Sakshi Samachar

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में रणनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर (पीके) की एंट्री ने मुकाबला काफी दिलचस्प बना बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीके भले ही चुनाव में कुछ खास न कर सके, लेकिन कई सूरमाओं का खेल जरूर बिगाड़ सकते हैं।

नीतीश कुमार से अलग होने के बाद पीके ने अपनी चुनावी पारी का ऐलान किया। उन्होंने 'बात बिहार की' अभियान के जरिए युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। बात बिहार की' अभियान के जरिए अब तक करीब ढाई लाख से ज्यादा लोग पीके से जुड़ चुके हैं।

प्रेस कांफ्रेंस करते पीके (फाइल फोटो)

पीके ने बनाया नया राजनीतिक समीकरण

बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन विपक्षी दलों के महागठबंधन पर भारी नजर आ रहा है। लोकसभा चुनाव 2019 में इसकी बानगी लोगों ने देखा भी है, लेकिन प्रशांत किशोर की एंट्री से नया राजनीतिक समीकरण जरूर बनेगा। प्रशांत किशोर बिहार के राजनीतिक दांव-पेच बहुत अच्छे से जानते हैं। उन्हें यह बात मालूम है कि किस क्षेत्र में कैसा उम्मीदवार उतारा जाए, जो अन्य दलों का खेल बिगाड़ पाए।

दिल्ली सीएम केजरीवाल के साथ प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)

केजरीवाल की राह पर पीके

केजरीवाल ने राजधानी दिल्ली में अपनी राजनीतिक पारी युवाओं के सहारे ही शुरू की थी। उस वक्त केजरीवाल के साथ युवाओं की बड़ी तादात साथ थी। सभी ने उनके लिए चुनावी कैंपेन में पूरा जोर लगाया था। पीके भी युवाओं को साथ लाने के लिए 'बात बिहार की' अभियान की शुरुआत की है। वह ऐसे युवाओं को मौका देना चाहते हैं, जो स्वच्छ राजनीति में विश्वास रखते हैं।

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छोटे दलों को साधने की कोशिश

प्रशांत किशोर नीतीश कुमार को झटका देने के लिए छोटे दलों को साथ सकते हैं। इसमें जनाधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव का नाम सबसे आगे है। इसके अलावा महागठबंधन में सहमति नहीं बनने की शर्त पर वह उपेंद्र कुशवाहा से संपर्क कर सकते हैं।

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