..तो इसलिए एकजुट होने जा रहे हैं सिंधिया व दिग्गी राजा, नहीं तो कट सकता है ‘पत्ता’

ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो) - Sakshi Samachar

भोपाल : एक समय में एक दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज गुना में मुलाकात होने की खबरें आ रही हैं। ऐसा माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह के घोषित कार्यक्रम में सोमवार दोपहर गुना सर्किट हाउस में सिंधिया से मुलाकात करने जा रहे हैं। दोनों विरोधी नेताओं के बीच यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब सिंधिया के तेवर कमलनाथ सरकार के खिलाफ काफी सख्त हैं।

मुलाकात की वजह

हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के घोषित कार्यक्रम में दिग्विजय से मुलाकात का तो जिक्र नहीं है, लेकिन उनके कार्यक्रम में सोमवार दोपहर गुना सर्किट हाउस का जिक्र जरूर बताया जा रहा है। ऐसी सूरत में इतना तो तय है कि सोमवार दोपहर दोनों नेता एक ही जगह मौजूद रहेंगे। ये देखना दिलचस्प होगा कि दोनों नेता मुलाकात करते हैं या नहीं..? अगर मुलाकात होती है तो क्या बात होती है..? दोनों के निशाने पर कौन रहता है..?

दरअसल, मध्यप्रदेश की राजनीति में सिंधिया और दिग्विजय को एक दूसरे का धुर विरोधी माना जाता है और जाहिर है दोनों नेताओं की अगर मुलाकात होती है तो सुर्खियां जरूर बनती हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)

मामला मध्यप्रदेश में इस साल राज्यसभा की खाली हो रही तीन सीटों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया के साथ साथ कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का राज्यसभा में कार्यकाल पूरा होने जा रहा है और दिग्विजय सिंह व ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों लोकसभा चुनाव हारने के बाद राज्यसभा में जाने का सपना पाल रखे हैं।

यह है चुनावी गणित

9 अप्रैल को राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने वाली हैं जिनमें से दो सीटें कांग्रेस के पास जाएंगी, तो वहीं 1 सीट भाजपा के पास जाना तय है। पहले ये कयासें लगाई जा रही थी कि इन दो सीटों से राज्य के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा से सांसद चुने जा सकते हैं, लेकिन अस सीन में अब प्रियंका वाड्रा की इंट्री हो गयी है। इनमें से एक सीट पर उन्हें भी राज्यसभा से सांसद बनाने की खबर आ रही है। ऐसे में अब सिंधिया या दिग्विजय में से किसी एक का पत्ता कट सकता है।

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खबरों की माने तो सिंधिया को ही बलि का बकरा बनाये जाने की सबसे ज्यादा संभावना है। लोगों का यह भी कहना है कि अगर ऐसा होता है, तो मध्य प्रदेश कांग्रेस में जल्द ही बगावत देखने को मिल सकती है।

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