नई दिल्ली : लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया गया। एक तरफ सरकार ने विपक्ष के सारे जवाब देने का वादा किया है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इस विधेयक के खिलाफ है। ऐसे में असली परीक्षा अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार की है।

महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार है, जिसमें कांग्रेस और एनसीपी बराबर के सहयोगी हैं। शिवसेना ने पहले ही तय कर दिया है कि वह इस बिल पर केंद्र सरकार का साथ देगी, जबकि कांग्रेस बिल को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया है। इस तरह कहीं न कहीं इस मुद्दे पर शिवसेना और कांग्रेस आमने-सामने आ गई है।

महाराष्ट्र में राकांपा, कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रही शिवसेना ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) का समर्थन करने का फैसला किया है। जबकि कांग्रेस ने पहले ही इस विधेयक को 'असंवैधानिक' करार दिया है। लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह बिल संविधान के खिलाफ है।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने सोमवार को ट्विटर पर इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा, "गैर-कानूनी रूप से रह रहे घुसपैठियों को बाहर निकाला जाना चाहिए।"

राउत ने आगे कहा, "अप्रवासी हिंदुओं को नागरिकता दी जानी चाहिए, लेकिन अमित शाह, वोट बैंक बनाने के आरोपों को विराम दें और उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं दें। इस पर आप क्या कहते हैं? और हां (कश्मीरी) पंडितों के बारे में आपका क्या कहना है? क्या अनुच्छेद 370 रद्द किए जाने के बाद वे वापस कश्मीर जाकर रह पाएंगे?"

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नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019, के तहत उन हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों, पारसियों, जैनों, और बौद्धों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान की जाएगी, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न से भाग कर यहां आए हैं। हालांकि कांग्रेस के साथ विपक्ष ने पहले ही इस पर आपत्ति जता दी है।

वहीं अल्पसंख्यक संगठन भी इस विधेयक से मुस्लिमों को बाहर रखने को लेकर इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति को उनके धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करना संविधान के खिलाफ है।