नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पेश कर दिया है। लोकसभा में विधेयक को पेश किये जाने के लिए विपक्ष की मांग पर मतदान करवाया गया और सदन ने 82 के मुकाबले 293 मतों से इस विधेयक को पेश करने की स्वीकृति दे दी। इस समय लोकसभा में विधेयक को लेकर बहर चल रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता बिल को लेकर डरने की जरूर नहीं है। इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। हम नागरिकता बिल को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अल्पसंख्यकों को लेकर भेदभाव नहीं कर रहे।

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को संविधान के मूल भावना एवं अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की ।

गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस, आईयूएमएल, एआईएमआईएम, तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक कहीं भी देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। इसमें संविधान के किसी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया।

शाह बोले- कांग्रेस अगर धर्म के अधार देश का विभाजन न करती तो नहीं पड़ती विधेयक की जरूरत

शाह ने सदन में यह भी कहा ‘‘अगर कांग्रेस पार्टी देश की आजादी के समय धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं करती तो इस विधेयक की जरूरत नहीं पड़ती।''

नागरिकता अधिनियम, 1955 का एक और संशोधन करने वाले विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर आए उन गैर-मुसलमानों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो।

अधीर रंजन चौधरी ने किया विधेयक का विरोध

शाह ने जब विधेयक पेश करने के लिए सदन की अनुमति मांगी तो कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह अल्पसंख्यकों को लक्ष्य कर लाया गया विधेयक है। इस पर गृह मंत्री ने कहा, ‘‘विधेयक देश के अल्पसंख्यकों के 0.001 प्रतिशत भी खिलाफ नहीं है।''

उन्होंने चौधरी की टिप्पणियों पर कहा कि विधेयक के गुण-दोषों पर इसे पेश किये जाने से पहले चर्चा नहीं हो सकती। सदन की नियमावली के तहत किसी भी विधेयक का विरोध इस आधार पर हो सकता है कि क्या सदन के पास उस पर विचार करने की विधायी क्षमता है कि नहीं।

शाह बोले- विधेयक पर चर्चा के सदस्यों की हर चिंता का दूंगा जवाब

शाह ने कहा ‘‘ विधेयक पर चर्चा के बाद मैं सदस्यों की हर चिंता का जवाब दूंगा।'' लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदस्यों को विधेयक पर चर्चा के दौरान उनकी विस्तार से बात रखने का मौका मिलेगा। अभी वह अपना विषय संक्षिप्त में रख दें। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि गृह मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं। वह (शाह) इस सदन के नये सदस्य हैं। उन्हें कम जानकारी है। इस पर भाजपा के सदस्यों ने विरोध जताया।

द्रमुक के टी आर बालू ने श्रीलंकाई तमिलों के विषय को उठाया। इसके बाद पार्टी के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। आईयूएमएल के पी के कुन्हालीकुट्टी और ई टी मोहम्मद बशीर, कांग्रेस के शशि थरूर तथा एआईएमआइएम के असदुद्दीन ओवैसी ने भी विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करने वाला बताते हुए और इसे पेश किये जाने का विरोध किया।

ये राज्य नहीं आएंगे दायरे में

जानकारी के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम जहां इनर लाइन परमिट (आईएलपी) की व्यवस्था लागू है उसे सीएबी के दायरे से बाहर रखा जाएगा, जिसको लेकर 2019 के आम चुनाव में इलाके में राजनीतिक विवाद पैदा हुआ।

आईएलपी भारत सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है जिसके तहत सुरक्षित इलाके में एक सीमित अवधि के लिए भारत के नागरिकों को यात्रा की अनुमति प्रदान की जाती है।

सूत्रों ने बताया कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस विधेयक में असम, मेघालय और त्रिपुरा के जनजातीय इलाकों को छोड़ दिया जाएगा। ये ऐसे जनजातीय इलाके हैं जहां संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त परिषद व जिले बनाए गए हैं।

विपक्ष ने पहले ही विरोध किया

पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंग्लादेश में उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों को नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के तहत भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी। इस विधेयक का विपक्ष ने पहले ही विरोध किया है। कांग्रेस ने इसे असंवैधानिक करार दिया है।

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संशोधन प्रस्ताव पेश करेगी माकपा

विधेयक में मुस्लिम को छोड़ देने को लेकर अल्पसंख्यक गुटों ने भी इसका विरोध किया है। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान ऐलान किया कि वह प्रस्तावित विधेयक में दो संशोधन का प्रस्ताव पेश करेगी।