नई दिल्ली : महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार पर कांग्रेस और एनसीपी अबतक मन नहीं बना पाए हैं। इस बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। वैसे तो मुलाकात का मुद्दा महाराष्ट्र में किसानों की दिक्कत है। लेकिन इसे सियासी नजरिए से भी देखा जा रहा है, हालांकि एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने इस मुलाकात पर कहा कि किसी तरह की कयासबाजी की जरूरत नहीं है। महाराष्ट्र में किसानों की समस्या पर चर्चा होनी है।  इन सबके बीच शिवसेना ने मोदी-पवार की मुलाकात को सामान्य बताया है।

पीएम मोदी से मुलाकात के बीद शरद पवार ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन की वजह से किसानों के मुद्दे पर पीएम का ध्यान अपेक्षित है। वो पीएम के आभारी रहेंगे यदि वो किसानों की भलाई के लिए तत्काल कदम उठाएं। किसानों की समस्या किसी खास पार्टी तक ही सीमित नहीं है। पवार ने कहा कि उन्होंने दो जिलों के आंकड़े इकठ्ठे किए हैं, लेकिन पूरे महाराष्ट्र की तस्वीर एक जैसी है।

आपको बता दें कि शरद पवार और पीएम मोदी की मुलाकात की जानकारी शिवसेना सांसद संजय राउत ने सोमवार को ही दी थी। उन्होंने कहा था कि हम किसानों के मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. उन्होंने बताया कि ये मुलाकात शरद पवार की अगुवाई में ही होगी।

संजय राउत ने मीडिया के सवाल पर कहा कि पवार साहब किसान नेता हैं। वह प्रधानमंत्री से मिलकर महाराष्ट्र के किसानो की हालत बताएंगे। उन्होंने कहा, 'पवार साहब प्रधानमंत्री से मिलकर राज्य के किसानों के लिए ज्यादा-से-ज्यादा राहत की मांग करेंगे।' उन्होंने फिर दावा किया कि महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन की सरकार जरूर बनेगी जिसका रास्ता गुरुवार तक साफ हो जाएगा।

इस बीच आज कांग्रेस और एनसीपी के बीच भी मीटिंग होने वाली है। इस मीटिंग में सरकार बनाने की रणनीति पर चर्चा किया जाएगा। मीटिंग में शामिल होने के लिए एनसीपी और कांग्रेस के कई सीनियर नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। दरअसल ये मीटिंग मंगलवार को ही होनी थी लेकिन इस बैठक को आज के लिए टाल दिया गया था।

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महाराष्ट्र कांग्रेस के अंदरुनी सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पार्टी के ज्यादातर विधायक शिवसेना के साथ सरकार बनाना चाहते हैं। कांग्रेस के 41 विधायक सरकार में शामिल होने के पक्ष में हैं। इन विधायकों की तरफ से पार्टी आलाकमान को मैसेज भेजा गया है कि सरकार का गठन जल्द से जल्द किया जाए। यानी कांग्रेस धीरे-धीरे ही सही शिवसेना के साथ में सरकार बनाने के पक्ष में दिखाई पड़ रही है लेकिन ये कब तक होगा कहना मुश्किल है।