मुंबई : महाराष्ट्र में छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लग गया है। बावजूद इसके सभी राजनीतिक दल सत्ता पर काबिज होने के लिए जोर आजमाइश में लगी हुई है। तमाम खबरों के बीच कहा यह भी जा रहा है कि आखिर में भाजपा-शिवसेना एक बार फिर साथ आ सकते हैं, क्योंकि दोनों ही पार्टी के नेताओं के बयान फिर से गठबंधन के संकेत दे रहे हैं।

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी भाजपा महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए अनाधिकारिक माध्यमों से अभी भी संपर्क कर रही है। ठाकरे ने कहा, "वे हर बार अस्पष्ट और अलग-अलग प्रस्ताव दे रहे हैं। लेकिन हमने कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ जाने का निर्णय लिया है।"

इसके थोड़ी ही देर बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने उद्धव के बयान की एक तरह से पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें सरकार गठन के लिए भाजपा संग गठबंधन को फिर से जिंदा करने पर शिवसेना को समझाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए लगा रखा है।

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राणे ने कहा, "हम 145 सदस्यों के एक सामान्य बहुमत की कोशिश में लगे हुए हैं, हमारा यही लक्ष्य है और हम राज्यपाल को उसे सौंपेंगे। मुझे नहीं लगता कि शिवसेना राकांपा-कांग्रेस के साथ जाएगी। वे शिवसेना को मोहरा बना रहे हैं।"

उद्धव ठाकरे ने कहा, "वे हमारे ऊपर भाजपा को छोड़कर हर किसी से पहले से ही बात करने आरोप लगा रहे हैं। लेकिन अब सच्चाई सामने आ गई है। हमारे पास बातचीत का समय था, लेकिन मैं इस दिशा में नहीं जाना चाहता था, जिस दिशा में चर्चा हो रही है।"