चंडीगढ़ : 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के साथ पहली बार सत्ता संभालने वाली भारतीय जनता पार्टी 2019 के राज्य विधानसभा चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के इरादे से एक सुनिश्चित प्लान के तहत तैयारी कर रही है। भाजपा राज्य में 1977 का इतिहास दोहराना चाहती है। गौरतलब है कि 1977 में जनता पार्टी ने राज्य की 90 सीटों में से 75 सीटें जीतकर कांग्रेस पार्टी को सत्ता से बेदखल कर दिया था और उस वक्त कांग्रेस को सिर्फ तीन सीटें नसीब हुई थीं।

हालांकि बाद में राज्य में कांग्रेस और ओमप्रकाश चौटाला की पार्टी की सरकारें बनीं। 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में मोदी लहर की बदौलत राज्य में पहली बार सत्ता का स्वाद चख चुकी भाजपा इस बार पिछली बार के मुकाबले अधिक सीटों के साथ सरकार बनाने की दिशा में तैयारी करती दिख रही है।

जीत को लेकर अश्वस्त है भाजपा

बहुत जल्द होने वाले 3 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा हरियाणा को लेकर न केवल अश्वस्त है बल्कि पिछली बार के मुकाबले अधिक सीटें जीतकर राज्य में कांग्रेस का एक तरह से सफाया करना चाहती है। भाजपा के एक प्रमुख नेता के मुताबिक भाजपा का चुनाव में राज्य में सबसे अधिक सीटें जीतने का रिकॉर्ड कायम करना तय है।

मजबूत नेता बनकर उभरे खट्टर

अपने प्लान के तहत भाजपा का फोकस राज्य में गैर जाट राजनीति पर होने की संभावना है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इसके सबसे बड़े और सफल नेता बनकर उभरे हैं। गौरतलब है कि पिछली बार मनोहर लाल को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने को लेकर पार्टी के एक गुट को संदेह था, लेकिन मनोहर लाल राज्य में पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता बन गए हैं। जाट आंदोलन, रामपाल और राम रहीम जैसे मामलों से गुजर कर भाजपा के मंदर और बाहर एक मजबूत और लोकप्रिय नेता बन गए हैं।

विपक्ष में अदरूनी झगड़ा

काफी समय से राज्य में सबसे बड़ा क्षेत्रीय राजनीतिक दल रहे इंडियन नेशनल लोकदल दो हिस्सों में बंट गया है और इस बार वे दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। इनोलो चीफ व पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटालाके बेटों के बीच टकराव के चलते पार्टी के नेता व कार्यकर्ता भी एक तरह से बंट गए हैं। हालांकि पार्टी के कुछ नेता किसी तरह दोनों धड़ों के बीच तालमेल बिठाकर उन्हें फिर से एकसाथ लाने की कोशिश में जुटे हैं।

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प्रदेश में प्रमुख क्षेत्रीय दल इंडियन नेशनल लोकदल के बंट जाने और कांग्रेस में अंदरुनी झगड़े की वजह से राज्य में विपक्ष सत्तापक्ष भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में नहीं दिख रहा है। हालांकि कांग्रेस ने चुनाव के पहले अंसतुष्ट चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा को विधायक दल का नेता व कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर अपने अंदरूनी विवादों को कम करने की कोशिश की है।