पटना : कहते है कि राजनीति की रेस में हर समय आपको चौकन्ना व अप टू डेट रहना पड़ता है। नहीं तो, कोई न कोई जरूर आपको पीछे धकेल कर आगे निकलता जाएगा और आप एकदिन हासिए पर आ जाएंगे। कुछ ऐसा ही आजकल बिहार की राजनीति में लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप के साथ हो रहा है। पारिवारिक विवाद व अपनी हरकतों से मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले तेजप्रताप राजनीतिक माहौल से दूर होते जा रहे हैं।

लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के सितारे गर्दिश में दिख रहे हैं। कुछ दिन पहले तक तेजप्रताप केवल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की गतिविधियों से दूर रहा करते थे, लेकिन अब आलम ये है कि उन्हें पार्टी के बैनर और पोस्टरों से भी दूर किया जाने लगा है।

तेजप्रताप यादव 
तेजप्रताप यादव 

कहा जा रहा है कि अपनी हरकतों से बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री पहले काम तो अब नाम के भी मोहताज हो गए हैं। परिवार व पार्टी के लोग कई बार तेजप्रताप को समझाने व ऐसा कोई काम न करने की सलाह दिया करते थे कि जिससे परिवार के साथ साथ पार्टी की किरकिरी न हो। सबको नजरंदाज करते हुए तेजप्रताप कभी अपने पारिवारिक मतभेद तो कभी अपनी भेषभूषा को लेकर सुर्खियों में आते रहे। लेकिन राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भूमिका कम होती जा रही है।

वहीं दूसरी ओर उनके छोटे भाई और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) लगातार बैठकें करके पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के साथ साथ बिहार में विपक्ष को मजबूत करने की कवायद में लगे हुए हैं। इसीलिए अब तेजस्वी तेजप्रताप को बैठक में शामिल करना तो दूर पार्टी के बैनरों-पोस्टरों में भी जगह नहीं देने की सोच रहे हैं।

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कुछ लोग इसे महज एक संयोग या चूक कह सकते हैं। पर राजनीति में इसे संयोग नहीं, बल्कि सत्ता का संघर्ष कहा जा रहा है। वैसे भी लालू यादव जेल जाने से पहले तेजस्वी को पार्टी की कमान देने का मन बना चुके थे और लालू यादव उन्हें ही अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी मानते हैं।

तेजस्वी यादव 
तेजस्वी यादव 

कहा जा रहा है कि राजनीति की रेस में तेजस्वी अपने भाई तेजप्रताप से बहुत आगे निकल गए हैं और अब तेजप्रताप अपनी हरकतों से इस कदर पिछड़ते जा रहे हैं कि उन्हें दोबारा पार्टी में जगह बनाने के लिए जूझना पड़ सकता है।

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आरजेडी के बड़े नेता भी अब मजबूत दावेदार या कह लीजिए जिसे लालू ने अपना उत्तराधिकारी माना है, उसी के साथ चलने को राजी हैं। जाहिर है जब पार्टी ने अपना नेता तेजस्वी यादव को चुना है तो फिर तेजप्रताप के साथ खड़े होने को कौन तैयार होगा। ऐसे भी तेजप्रताप धीरे-धीरे पार्टी से आउट ऑफ सीन होना ही था। सब लोग जानते हैं कि पार्टी का कोई कार्यक्रम हो, मिलन समारोह हो या फिर कोई बैठक। तेजप्रताप न तो इन कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और अब इन बैनर-पोस्टरों में भी उनकी कोई तस्वीर नहीं लगती है।

इसी तरह के हालात लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भी देखे गए थे।तब से लोकर आजतक तेजप्रताप लगातार कमजोर होते जा रहे हैं तो उनके छोटे भाई तेजस्वी मजबूत हो रहे हैं। अगर किसी कारण से तेजप्रताप भी अपने को मजबूत करने को कुछ करना शुरू करेंगे तो परिवार में घमासान के साथ साथ सत्ता के लिए संघर्ष भी सड़कों पर आएगा।