नई दिल्ली : राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी के 6 विधायकों को कांग्रेस पार्टी में शामिल करवाने वाले राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जहां बसपा प्रमुख मायावती का गुस्सा झेलना पड़ रहा है, वही दूसरी तरफ, उपमुख्यमंत्री व प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट भी गहलोत से नाराज चल रहे हैं।

गहलोत के प्रति सचिन पायलट की नाराजगी की वजह उनकी अनुमति के बगैर गहलोत द्वारा बसपा के छह विधायकों को कांग्रेस पार्टी में शामिल किया जाना बताई जा रही है। यही नहीं, बसपा को छोड़ कांग्रेस का दामन थामने वाले छह विधायकों ने अभी तक सचिन पायलट से मुलाकात तक नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की अनुमति के बगैर दूसरी पार्टी के नेताओं को कांग्रेस में शामिल किए जाने को लेकर सचिन पायलट के सख्त नाराज होने की खबर है।

सूत्रों की मानें तो सचिन पायलट इस बाबत जल्द ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से शिकायत करेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले हुए सभी मुख्यमंत्रियों के साथ आयोजित बैठक में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत को सचिन पायलट के साथ मिलकर काम करने की हिदायद दी थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस बार अकेले ही फैसला लिया है।

ये कोई पहली बार नहीं है जब अशोक गहलोत ने विधायकों को अपने पाले में किया हो। इससे पहले भी जब राजस्थान सरकार का गठन हुआ था तब भी 11 निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया था।

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कुल 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा के लिए हुए 2018 में चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 99 सीटें मिली थीं और बाद में हुए उपचुनाव में एक सीट जीतने से उसकी सीटों का आंकड़ा 100 तक पहुंच गया था। काफी रस्सा-कस्सी के बाद कांग्रेस पार्टी ने राज्य में निर्दलीय विधायकों के समर्थन से अशोक गहलोत ने अपनी सरकार बनाई और अब बसपा के 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया है।

ये बात और है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के बीच कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद भी तालमेल नहीं बन पा रहा है।