नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी शख्सियत से आज दुनिया परिचित है। भारतीय राजनीति को एक नई दिशा देने वाले पीएम मोदी विश्व के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। लेकिन यह बात किसी से छुपी नहीं है कि नरेंद्र मोदी को सीएम मोदी और फिर पीएम मोदी बनाने में भाजपा के 'चाणक्य' कहे जाने वाले अमित शाह का बहुत बड़ा किरदार है। पीएम मोदी का आज 69वां जन्मदिन है। इस मौके पर आइए जानते हैं राजनीति में कैसे बनी 'मोदी-शाह' की यह बेमिसाल जोड़ी।

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की दोस्ती गुजरात से होते हुए अब भारतीय राजनीति की नंबर वन जोड़ी बन गई है। मोदी जहां पर्दे के आगे से अपना जलवा दिखाते हैं, वहीं अमित शाह पूरा खेल पर्दे के पीछे से खेलते हैं। दोनों की इस केमेस्ट्री की बदौलत ही यह जोड़ी बेमिसाल बनती है।

कब हुई पहली मुलाकात

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पहली मुलाकात साल 1982 में हुई थी। इन दोनों को जोड़ने का काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने किया। जानकार बताते हैं कि जब नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में आरएसएस के जिला प्रचारक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे तो अमित शाह एबीवीपी से जुड़े थे। इस दौरान दोनों की अक्सर मुलाकात होती रहती थी। धीरे-धीरे इनकी दोस्ती गहरी होती चली गई।

लालकृष्ण आडवाणी के साथ बैठ नरेंद्र मोदी एवं पीछे खड़े अमित शाह (फाइल फोटो)
लालकृष्ण आडवाणी के साथ बैठ नरेंद्र मोदी एवं पीछे खड़े अमित शाह (फाइल फोटो)

इस चुनाव ने दोनों को लाया नजदीक

संघ और एबीवीपी से निकलकर अब दोनों भाजपा से जुड़ चुके थे। साल 1986 में पीएम मोदी को गुजरात में भाजपा सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई तो अमित शाह भाजपा युवा मोर्चा से जुड़ गए। साल 1991 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के जमकर प्रचार किया था। इस दौरान भी दोनों काफी समय एक-दूसरे के साथ गुजारते थे।

नरेंद्र मोदी एवं अमित शाह की एक पुरानी तस्वीर
नरेंद्र मोदी एवं अमित शाह की एक पुरानी तस्वीर

मोदी की नजर में शाह की अहमियत

गुजरात में मोदी की लोकप्रियता बढ़ती गई और 2001 में जब मुख्यमंत्री बने तो वह अपने दोस्त अमित शाह को नहीं भूले। एक तरफ मोदी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली तो अमित शाह को महज 37 साल में मंत्री बना दिया। इस बात से लोगों को अंदाजा हो गया कि यह दोस्ती यूं ही बेमिसाल नहीं है।

अमित शाह को मिठाई खिलाते मोदी (फाइल फोटो)
अमित शाह को मिठाई खिलाते मोदी (फाइल फोटो)

गुजरात से दिल्ली तक का सफर

गुजरात में 15 सालों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद नरेंद्र मोदी ने जब दिल्ली की ओर रूख किया तो वह अकेले नहीं आए, यहां भी उनके साथ अमित शाह आए। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी ने जहां पर्दे के आगे की जिम्मेदारी संभाली और ताबड़तोड़ रैलियों के जरिए लोगों के बीच पहुंचे, वहीं अमित शाह ने पर्दे के पीछे से अपना रणनीतिक दांव-पेंच चला।

पीएम मोदी का स्वागत करते अमित शाह (फाइल फोटो)
पीएम मोदी का स्वागत करते अमित शाह (फाइल फोटो)

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मोदी और शाह की जोड़ी का ही असर था कि भाजपा ने प्रचंड बहुमत से सत्ता में वापसी की। पांच साल सरकार चलाने के बाद एक बार फिर साल 2019 में इस जोड़ी की सबसे बड़ी परीक्षा थी। लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी के लिए नामुकिन कुछ भी नहीं है। साल 2019 के आम चुनाव में भाजपा ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। भाजपा ने 300 से ज्यादा सीटें जीती।