जयपुर : राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार को कानून व्यवस्था को लेकर और अधिक गंभीर होना चाहिए क्योंकि लोगों को उससे बड़ी उम्मीद हैं।

पायलट ने कुछ हालिया घटनाओं के मद्देनजर राज्य में कानून व्यवस्था संबंधी एक सवाल के जवाब में यहां कहा, ‘‘जहां जहां कानून व्यवस्था ढीली हुई है, उस पर सरकार पूरी तरह निगरानी रखे हुए है। चाहे व सांप्रदायिकता की आड़ में कानून व्यवस्था तोड़ी गयी हो, चाहे फायरिंग हुई या अलवर का जेल ब्रेक हो, सरकार ने इन सबको बहुत गंभीरता से लिया है।''

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमें और ध्यान रखना पड़ेगा क्योंकि प्रदेश की जनता को हमसे बहुत उम्मीदें हैं और मुझे लगता है कि कानून व्यवस्था ‘गवर्नेंस' एक बहुत अहम हिस्सा है, इस पर हमें काम करना चाहिए और अगर कोई कमी रही है तो उसे सुधारना चाहिए।'

पायलट ने कहा, ‘‘...हमारी मां बहन बेटियां सुरक्षित रहें, लोग अपना जीवन सुरक्षा के वातावरण में निर्वहन कर सकें, यह हमारी प्राथमिकता रहनी चाहिए और सरकार को गंभीरता से कानून व्यवस्था को बनाए रखना चाहिए।''

उल्लेखनीय है कि राज्य में गृह विभाग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने राज्य में कानून व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाया है। पायलट ने इस पर कहा, ‘‘वह प्रतिपक्ष के नेता हैं तो स्वाभाविक रूप से यह उनका सरकार पर हमला करने का एक बिंदु हो सकता है। लेकिन यह बात भी सच है कि हम लोगों को कानून व्यवस्था पर अधिक ध्यान देना चाहिए।''

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सचिन पायलट ने कहा, ‘‘हाल में जो घटनाएं हुई हैं, उसको लेकर सरकार बहुत गंभीर है और हमने कुछ कदम भी उठाए हैं ताकि इन चीजों पर लगाम लगे और इनकी पुनरावृत्ति नहीं हो। लेकिन यह बात भी सही है कि कानून व्यवस्था चाहे वह धौलपुर की घटना हो, अलवर की घटना हो, बहरोड़ की घटना हो, काफी जगहों पर कानून व्यवस्था बाधित हुयी है... इस पर हमें और गंभीरता से काम करना चाहिए।''

नये मोटर वाहन कानून में नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माने पर उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं यह कहना चाहता हूं कि जो चीज व्यावहारिक है उसे हमें करना चाहिए। कानून का पालन सब करें, यह हमारी जिम्मेदारी है। लेकिन जो चीजें व्यावहारिक नहीं हैं उन पर पुनर्विचार करने में किसी को आपत्ति नहीं आनी चाहिए। अब गुजरात की सरकार ने खुद यह कह दिया है कि केंद्र सरकार ने जो किया वह सही नहीं है तो यह बात पार्टी या सरकार की नहीं यह व्यावहारिकता की बात है।'