ऐसे जाहिर हो रहा है नीतीश कुमार का बिहार में फिर से सरकार बनाने का कॉन्फिडेंस.. !

जदयू का नया नारा  - Sakshi Samachar

पटना : बिहार में विधानसभा चुनाव अगले साल होना है, परंतु सभी राजनीतिक दल अभी से इसकी तैयारी में जुट गए हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने अब अपने मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर एक नारा तैयार किया है। पटना में जदयू के दफ्तर के बाहर नया नारा लिखा हुआ है, नारा है 'क्यों करें विचार ठीके तो हैं नीतीश कुमार'। पार्टी के प्रदेश कार्यालय के समीप इस नारे के होर्डिंग भी लगा दिए गए हैं।

खास देसी अंदाज में लिखे गए इस नारे में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि जब नीतीश कुमार हैं ही तो फिर दूसरे के नाम पर विचार क्यों किया जाए। परंतु नारे में 'ठीके तो हैं' को लेकर विपक्ष जद (यू) पर निशाना साध रहा है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक विजय प्रकाश कहते हैं कि जद (यू) ने अपने नारों से ही हकीकत बयान कर दिया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार 'ठीके हैं' न कि 'ठीक हैं'। नीतीश को जदयू भी अब मजबूरी का मुख्यमंत्री मान रहा है।

राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह कहते हैं कि 'ठीके हैं' और 'ठीक हैं' में बड़ा अंतर है। इसे और स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि 'ठीके हैं' का मतलब कामचलाऊ होता है। ऐसे में नीतीश की स्थिति को समझा जा सकता है।

इस नारे को लेकर जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह कहते हैं, "यह नारा बिहार के आम लोगों की आवाज है। गांव-गांव में लोग अभी से कहने लगे हैं कि जब नीतीश कुमार हैं ही तो अन्य नामों पर विचार करने की जरूरत ही क्या है।"

उन्होंने कहा, "नीतीश के मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार विकास के पथ पर अग्रसर है, ऐसे में कोई अन्य पर विचार क्यों करे।" जब उन्हें पूर्व सीएम और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा जीतन राम मांझी की उस सलाह की याद दिलाई गई कि नीतीश को अब भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ लेना चाहिए तो उन्होंने कहा कि मांझी की बातों को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता।

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उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ हमलोगों का गठबंधन अटूट है और राजद के साथ जाने का तो सवाल ही नहीं उठता।

उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में जदयू ने राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और उस समय जदयू का नारा 'बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है' था। यह नारा उस दौर में काफी चर्चित हुआ था।

आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में बिहार की 243 सीटों में से जदयू को 71, आरजेडी को 80, भाजपा को 53 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। बाद में नीतीश महागठबंधन का बंधन तोड़कर वापस एनडीए में आ गए थे और तबसे भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं।

इस साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा, जदयू और एलजेपी के एनडीए ने राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन का पूरी तरह से सफाया कर दिया था। लोकसभा चुनाव में 40 में से 17 सीटें भाजपा, 16 जदयू, 6 एलजेपी ने जीती थी और महागठबंधन में सिर्फ 1 सीट कांग्रेस को मिली थी। जबकि, 2015 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी राजद का खाता भी नहीं खुला था।

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