नई दिल्ली : जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है। शेहला रशीद के खिलाफ शिकायत सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने दायर की है। इसमें कथित तौर पर भारतीय सेना और भारत सरकार के खिलाफ फर्जी खबर फैलाने के आरोप में उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई है।

शेहला ने रविवार को कश्मीर के मौजूदा हालात को लेकर एक के बाद करीब दस ट्वीट किए। इन ट्वीट्स में उन्होंने दावा किया कि वहां हालात बेहद खराब है। उनके इस ट्वीट का इंडियन आर्मी की ओर से जवाब भी आ गया है। सेना ने शेहला के इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

सेना ने शेहला के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट के नेता शेहला राशिद द्वारा शेहला राशिद द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। ऐसी आधारहीन खबरों से लोगों में अस्थिरता पैदा हो सकती है।

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शेहला ने सेना पर लगाए यह आरोप

शेहला ने दावा किया था कि सशस्त्र बल जम्मू-कश्मीर में आम लोगों के घरों में "तोड़फोड़" कर रहे थे और लड़कों को उठा रहे थे। उसने आरोप लगाया था कि चार लोगों को सेना के जवानों ने हिरासत में लिया और शोपियां में प्रताड़ित किया। एक के बाद एक ट्वीट में, शेहला ने "लोगों" से कहा कि जम्मू और कश्मीर पुलिस विभाग के पास कोई कानून और व्यवस्था की स्थिति नहीं है। "उन्हें शक्तिहीन बना दिया गया है। सब कुछ अर्धसैनिक बलों के हाथों में है”।

जबकि जम्मू और कश्मीर में अभूतपूर्व सुरक्षा घेरा है, किसी भी हिस्से से कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई है। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि विरोध प्रदर्शन की छिटपुट घटनाएं हुई हैं, जिनमें से प्रत्येक में 20 से अधिक लोग भाग नहीं ले रहे हैं।

जम्मू में बीते कुछ दिनों से धारा 144 में ढील दी गई थी, लेकिन कश्मीर में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं। रविवार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विजय कुमार ने कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा की नई रणनीति के कारण इस क्षेत्र की स्थिति सामान्य हो रही है।

सोमवार को कई स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों को फिर से खोल दिए गए हैं। फिलहाल किसी भी हिंसा या अशांति की कोई रिपोर्ट नहीं थी।