नई दिल्ली/सोनभद्र : सोनिया गांधी के एक बार फिर कांग्रेस की कमान संभालते ही पार्टी ने नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ही बयान जारी कर कहा गया था कि अब कांग्रेस नए तेवर के साथ लोगों के बीच नई शुरुआत करेगी। इसी कड़ी में पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पहला कदम उठाया है।

प्रियंका गांधी अपनी शुरुआत उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से करेंगी, जहां उम्भा गांव का दौरा कर पिछले महीने नरसंहार में मारे गए आदिवासियों के परिवार वालों से मुलाकात करेंगी। पार्टी सूत्रों ने बताया कि प्रियंका गांधी मंगलवार को उम्भा पहुंचेंगी।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि प्रियंका के दौरे और उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन तैयारियां कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस महासचिव पीड़ित परिवारों से मिलने के अलावा उम्भा में हो रहे विकास कार्यों के बारे में आदिवासी समुदाय के लोगों से बातचीत करेंगी। वह घटना के बाद राज्य सरकार की ओर से आदिवासियों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों के बारे में भी जानकारी हासिल करेंगी।

कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (सौ. सोशल मीडिया)
कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (सौ. सोशल मीडिया)

सोनिया के कंधे पर कांग्रेस को उबारने की जिम्मेदारी

कांग्रेस ने ऐसे समय में सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है, जब पार्टी अपने सबसे मुश्किल दौरे में है। सोनिया गांधी इससे पहले 14 मार्च, 1998 से 16 दिसंबर, 2017 तक कांग्रेस अध्यक्ष रह चुकी हैं और उनके अध्यक्ष रहते 2004 से 2014 तक पार्टी केंद्र में सत्तासीन रही। सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनाने का कदम युवा और अनुभवी नेताओं के बीच सामंजस्य बनाते हुए पार्टी को आगे ले जाने की रणनीति के तहत उठाया गया है।

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माना जा रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में काम करने वाले युवा नेताओं को सोनिया के तहत काम करने में कोई दिक्कत नहीं होगी तथा अनुभवी नेताओं का तो सोनिया के नेतृत्व में काम करने का लंबा अनुभव है।

सीडब्ल्यूसी की बैठक में मौजूद एक नेता ने बताया, ‘‘बहुत सोच-विचार कर यह निर्णय लिया गया है। पार्टी के इस निर्णय के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि कांग्रेस में फिलहाल सोनिया एकमात्र ऐसी नेता हैं जो न सिर्फ पार्टी नेताओं, बल्कि दूसरे विपक्षी दलों को भी एक छतरी के नीचे ला सकती हैं।''