नई दिल्ली : कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष के लिए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने-अपने पसंद के उम्मीदवारों के नाम की पैरवी करना शुरू कर दी है, लेकिन सबसे ज्यादा उम्मीद इन दो युवा चेहरों की ओर देखी जा रही है, और माना जा रहा है कि इन्हीं दोनों में से किसी एक के साथ कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का ताज सजेगा।

वैसे तो ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट अपने-अपने राज्य में मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, लेकिन राहुल गांधी की बात मानते हुए दोनों ने अपने आप को इस से अलग कर लिया। लगता है कि नेहरू-गांधी परिवार इन दोनों नेताओं में से किसी एक को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का पद देकर उनकी वफादारी का इनाम देने की कोशिश करेगा।

आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था, कांग्रेस कार्यकारी समिति (सीडब्ल्यूसी) पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पर निर्णय के लिए 10 अगस्त को बैठक करेगी। माना जा रहा है कि कांग्रेस जल्‍द ही अपने नए अध्‍यक्ष के नाम पर फैसला ले सकती है।

कांग्रेस नेता मिलिद देवड़ा ने पंजाब के सीएम कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की मांग का समर्थन करते हुए अपनी ओर सचिन पायलट और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का नाम प्रस्‍तावित कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस रोल के लिए ऐसा चेहरा होना चाहिए, जिसकी पूरे देश में पहचान हो। ये दोनों चेहरे इस कसौटी पर खरे उतरते हैं। ये कांग्रेस के संगठन को मजबूत बना सकते हैं। हालांकि इनमें मिलिंद देवड़ा का भी नाम है। लेकिन कहा जा रहा है कि मिलिंद ने खुद ही अपने आपको इस रेस से बाहर कर दिया है।

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वहीं कांग्रेस का एक धड़ा इस बात पर भी जोर दे रहा है कि कांग्रेस की कमान प्र‍ियंका गांधी के हाथ में दे दी जाए। लेकिन राहुल गांधी खुद इस बात के खिलाफ हैं कि कांग्रेस की कमान गांधी परिवार में से किसी के पास जाए। उधर कैप्‍टन अमरिंदर सिंह समेत दूसरे वरिष्‍ठ नेता ये मांग कर चुके हैं कि अब कांग्रेस की कमान किसी युवा नेता के हाथ में जाए।

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त उनके इस्तीफे को अस्वीकार करते हुए सीडब्ल्यूसी ने उन्हें पार्टी में आमूलचूल बदलाव के लिए अधिकृत किया था, हालांकि गांधी अपने रुख पर अड़े रहे और स्पष्ट कर दिया कि न तो वह और न ही गांधी परिवार का कोई दूसरा सदस्य इस जिम्मेदारी को संभालेगा।

अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए गांधी ने यह भी कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष नहीं रहते हुए भी वह पार्टी के लिए सक्रिय रूप से काम करते रहेंगे। उनके समर्थन में बहुत सारे नेताओं ने भी इस्तीफा दे दिया था। गांधी के इस्तीफे के बाद से अगले अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पार्टी में लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नए अध्यक्ष को चुनने के लिए कई दौर की बैठकें हुईं लेकिन किसी नाम पर सहमति नहीं बन पाई।