पटना : बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एक चिट्ठी काफी चर्चा में है। इस चिट्ठी ने भाजपा और जेडीयू के बीच दूरी की खबर को और हवा दे दिया है। पिछले दिनों नीतीश कुमार के एक विभाग की ओर से जारी चिट्ठी में पुलिस अफसरों से आरएसएस समेत 19 हिंदुवादी संगठनों की जानकारी मांगी गई थी। अब इस चिट्ठी की वजह से भाजपा-जेडीयू गठबंधन में टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चिट्ठी भाजपा और जेडीयू के संबंध पर असर डालेगी, जिसका असर आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान देखने को मिल सकता है। भले ही अभी दोनों पार्टी एक साथ चुनाव में जाने की बात कह रही हों, लेकिन अंतिम समय तक निर्णय में बदलाव संभव है।

क्या अपने दम पर सत्ता में आना चाहती है भाजपा

जेडीयू के साथ भाजपा के बदले रवैये ने एक बात तो साफ कर दिया है कि अब दोनों में 'बड़ा भाई' कौन है, इस पर बहस होगी। अगले साल चुनाव होने हैं। राज्य में लोकसभा चुनाव में मिली सफलता से भाजपा गदगद है और उसे उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव के दौरान भी जनता का वही प्यार मिलेगा। भाजपा को उम्मीद है कि वह अपने दम पर सत्ता पर काबिज हो सकती है।

भाजपा पर दबाव बना रहे नीतीश

जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार अपनी शख्सियत के अनुरुप बयानबाजी में विश्वास नहीं करते हैं। वह अपना काम करते हैं और विरोधियों को चित करते हैं। हालांकि नीतीश कुमार के कई फैसले इस ओर जरूर इशारा कर रहे हैं कि राज्य में भाजपा की मनमर्जी नहीं चलेगी। हिंदुवादी संगठनों की जानकारी मांगने संबंधी चिट्ठी जारी करके नीतीश ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है।

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नीतीश के इन फैसलों से बढ़ी दूरी !

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार कई ऐसे फैसले ले रही है, जिस पर विपक्ष लगातार हमलावर है। जेडीयू भी उन्हीं में शामिल है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने, तीन तलाक जैसे मुद्दे पर जेडीयू मोदी के फैसलों के खिलाफ खुलकर सामने आ चुकी है।