नई दिल्ली। केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी इन दिनों अपना पूरा ध्यान उत्तरप्रदेश पर गड़ाए हुए हैं। हो भी क्यों ना, क्योंकि उसे राज्यसभा में अपना संख्याबल जो बढ़ाना है। इन सब के पीछे की वजह यह है कि तीन तलाक जैसे विवादित बिलों को पारित कराना उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन, हाल- फिलहाल में इसके लिए उसके पास उच्चसदन में बहुमत नहीं है।

इस चुनौती से निपटने के लिए उसने एक स्ट्रैटजी तैयार की है जो कि पिछले साल के अंत में बनाई गई है। अब जब इस साल के शुरुआती ६ महीने बीत चुके हैं तो उसका यह फार्मूला सटीक भी बैठ रहा है।

क्या है पार्टी की रणनीति

दरअसल मौजूदा राजनीतिक हालात से निपटने के लिए बीजेपी ने दलबदल का फार्मूला तैयार किया था। फार्मूले को बीजेपी चीफ अमित शाह ने तैयार किया था। इस फार्मूले को सबसे पहले दक्षिण भारत के आंध्रप्रदेश में अप्लाई किया गया। यहां टीडीपी के ४ सांसदो को इसी फार्मूले के तहत बीजेपी में शामिल करा लिया गया है। आंध्र के बाद बीजेपी की नजरें यूपी पर आ टिकी हैं।

हाल में ही यहां भी उनका फार्मूला काम करता दिखा। दरअसल सपा की टिकट पर सांसद नीरज शेखर ने पार्टी छोड़ बीजेपी ज्वाइन कर ली है। इसके बाद अब बीजेपी का अगला संभावित निशाना बसपा और सपा के दो- दो सांसद है। इसके पीछे का कारण यह है कि यहां से यदि कोई ऊपरी सदन का सदस्य इस्तीफा देता है तो वह स्वतः ही भाजपा के टिकट पर दोबारा निर्वाचित हो जाएगा।

यूपी के अलावा जम्मू पर भी है नजर

आंध्र और यूपी के अलावा बीजेपी की नजरें जम्मू कश्मीर पर भी है। यहां पर भी वह पीडीपी के दो सांसद नजीर अहम और मीर मोहम्मद फयाज पर भी उसने डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। सबसे गौर करने वाली बात है वो यह है कि दोनों सांसदों ने कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाए जाने का विरोध नहीं किया। दोनों सांसदों को इस बात का पता लग चुका है कि मौजूदा परिस्थितियों में पीडीपी के साथ रहने से कोई फायदा होने वाला नहीं है।

बता दें कि इसी साल मई महीने से लेकर अगले साल नवंबर 2020 तक राज्यसभा की 75 सीटों के लिए चुनाव होना है। माना जा रहा है कि अगले साल तक एनडीए को ऊपरी सदन में यूपी, बिहार, तमिलनाडु, गुजरात और मध्य प्रदेश से 19 सीटें बढ़ सकती है। पार्टी लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद से मिशन राज्यसभा में जुटी हुई है।