बेंगलुरु : कर्नाटक में कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिर गई है। पिछले कई दिनों से कर्नाटक में राजनीतिक संकट बना हुआ था। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा विधानसभा में आज पेश किए गए विश्वास मत प्रस्ताव पर पूरे दिन चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष द्वारा पूर्व निर्धारित समयानुसार शाम 6 बजे विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराई गई, जिसमें कुमारस्वामी सरकार के पक्ष में जहां 99 वोट पड़े, वहीं भाजपा के समर्थन में 105 वोट गिरे। इसके साथ ही कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार गिर गई।

विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने वोटिंग की प्रक्रिया शुरू की और इसी के तहत उन्होंने वोटिंग प्रक्रिया पूरी होने तक विधानसभा के दरवाजे भीतर से बंद रखने और सदन के सभी सदस्यों को उनके लिए आवंटित स्थानों पर बैठने का आदेश दिया।

बाद में विश्वास मत प्रस्ताव का विरोध करने वालों की गिनती की गई और उसी के आधार पर उन्होंने बताया कि कुमारस्वामी सरकार के पक्ष में जहां 99 वोट पड़े , वहीं विपक्षी दल भाजपा के समर्थन में 105 वोट मिले हैं।

इससे पहले विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद अपना जवाब देते हुए कुमारस्वामी ने सवाल किया ‘‘अगर उन्हें आप पर भरोसा था, तो उन्होंने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा क्यों खटखटाया?'' कुमारस्वामी ने अध्यक्ष से कहा, ‘‘हम सोमवार को विश्वासमत प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सहमत हो गए थे, लेकिन उच्चतम न्यायालय में घटनाक्रम के मद्देनजर और कई विधायक बोलने के इच्छुक हैं, हमें और समय दीजिये।'' कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि एक फर्जी पत्र फैलाया जा रहा है जिस पर उनके जाली हस्ताक्षर हैं कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।उज्धति में वोटिंग कराई गई।

इससे पहले विश्वासमत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कुमारस्वामी ने कहा कि वह खुशी-खुशी से मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सदन में चर्चा चल रही है कि मैंने इस्तीफा क्यों नहीं दिया और कुर्सी पर क्यों बना हुआ हूं। उन्होंने कहा कि जब विधानसभा चुनाव का परिणाम (2018 में) आया था, मैं राजनीति छोड़ने की सोच रहा था। राजनीति में मैं अचानक और अप्रत्याशित तौर पर आया था।

सदन में हंगामे के बीच प्रस्ताव पर चर्चा हुई। कांग्रेस ने शुरू से ही अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे कि मतविभाजन स्थगित कर दिया जाए क्योंकि शीर्ष अदालत में विश्वासमत के मुद्दे पर दो निर्दलीय विधायकों की अर्जियां विचाराधीन हैं।

उच्चतम न्यायालय कर्नाटक के दो निर्दलीय विधायकों की ताजा याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगा, जिसमें विश्वास प्रस्ताव पर राज्य विधानसभा में शक्तिपरीक्षण ‘‘तत्काल'' कराने का अनुरोध किया गया है।

सत्ताधारी गठबंधन से अपना समर्थन वापस लेने वाले विधायकों ने कुमारस्वामी सरकार को यह निर्देश देने की मांग की है कि वह सोमवार शाम पांच बजे या उससे पहले शक्ति परीक्षण कराये। विधानसभाध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने सरकार को बार-बार याद दिलाने के बाद सोमवार को दोपहर 11.45 बजे सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी कि उसे विश्वासमत की कार्यवाही सोमवार को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करना चाहिए, लेकिन कांग्रेस ने दिन की कार्यवाही के अंत में हंगामा किया।

कुमारस्वामी और उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर कार्यवाही की समाप्ति के समय सदन में मौजूद नहीं थे। उस समय कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा, ‘‘100 प्रतिशत .. मतदान कल हो सकता है।''

कार्यवाही लंबी चलने से क्षुब्ध प्रतीत हो रहे अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा कि मंगलवार को शाम 4 बजे तक चर्चा समाप्त हो जाएगी और शाम 6 बजे तक मतदान प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

मुंबई के एक होटल में ठहरे बागी विधायकों को चेतावनी देते हुए वरिष्ठ मंत्री डी के शिवकुमार ने उन्हें याद दिलाया कि यदि वे नोटिस के जवाब में मंगलवार को विधानसभाध्यक्ष के सामने नहीं आए तो वे अयोग्य ठहराये जाने का सामना करेंगे।

सत्तारूढ़ गठबंधन के 17 सहित 20 विधायकों ने सोमवार को सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। इसमें दो निर्दलीय और बसपा सदस्य एन महेश शामिल हैं जो सरकार का समर्थन कर रहे हैं। भाजपा सदस्यों ने अध्यक्ष से प्रक्रिया को सोमवार को ही समाप्त करने का कई बार अनुरोध किया।

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विधानसभा को लगभग दो घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया क्योंकि कांग्रेस और जदएस सदस्यों ने तब विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए और समय की मांग की जब अध्यक्ष ने उन्हें इसे जल्द समाप्त करने के लिए कहा ताकि विश्वासमत की प्रक्रिया पूरी हो सके। सदन की कार्यवाही पुन: शुरू होने पर जदएस-कांग्रेस के सदस्यों ने नारे लगाए, ‘‘हम न्याय चाहते हैं, हम चर्चा चाहते हैं।''

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एच के पाटिल ने कहा कि विश्वासमत की प्रक्रिया को उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद पूरा किया जाना चाहिए और कहा कि "यह पूर्ण सदन नहीं है", बागी विधायक मुंबई में हैं और सत्र में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं। इसमें हस्तक्षेप करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि दो निर्दलीय विधायकों ने विश्वासमत के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘अगर उन्हें आप पर भरोसा था, तो उन्होंने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा क्यों खटखटाया?'' कुमारस्वामी ने अध्यक्ष से कहा, ‘‘हम सोमवार को विश्वासमत प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सहमत हो गए थे, लेकिन उच्चतम न्यायालय में घटनाक्रम के मद्देनजर और कई विधायक बोलने के इच्छुक हैं, हमें और समय दीजिये।'' कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि एक फर्जी पत्र फैलाया जा रहा है जिस पर उनके जाली हस्ताक्षर हैं कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।उजे