नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी रहे नवजोत सिंह सिद्धू अपने अलग और अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते हैं चाहे क्रिकेट खेलने के दौरान उनका मिजाज रहा हो या फिर टीवी कार्यक्रमों के दौरान उनके जोरदार पंच या फिर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के साथ उनकी राजनीतिक पारी...। हर जगह उन्होंने अपनी अलग तरह की पहचान बनाई और हर जगह अपने अंदाज में ही अपना काम किया । वह कभी भी किसी चीज से समझौता करने के मूड में ज्यादा दिन तक नहीं दिखे।

उनके क्रिकेट कैरियर के दौरान भी ऐसा कहा जाता है कि उनकी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन से अक्सर अनबन हो जाया करती थी। इतना ही नहीं 1996 में उन्होंने तत्कालीन कप्तान अजहरुद्दीन के साथ हुए विवाद के बाद इंग्लैंड का दौरा छोड़कर बीच में ही भारत लौट आए थे। इसके बाद उस उनके क्रिकेट कैरियर पर तमाम तरह के सवाल लगाए जाने लगे थे।

इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी नवजोत सिंह कौर के साथ भारतीय जनता पार्टी में अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। यहां पर भी वह अक्सर अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल पर तरह-तरह के सवालिया निशान लगाते रहे। इन सब के बीच 2016 में जब उनको राज्यसभा में भेज दिया गया तो सिद्धू को यह बात नागवार गुजरी और कुछ दिनों तक चुप्पी साधने के बाद अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साथ अकाली दल के नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भाजपा को अलविदा कह दिया।

यह भी पढ़ें :

पंजाब की सड़कों पर लगे सिद्धू के पोस्टर , पूछा कब छोड़ रहे राजनीति

प्रियंका गांधी का दखल भी नहीं आया काम, कैप्‍टन ने सिद्धू का इस्‍तीफा किया मंजूर

भाजपा के बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी की ओर रुख किया और कांग्रेस की पंजाब में सरकार बनी तो उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। पर यहां भी उनकी बहुत ज्यादा दिन तक कैप्टन अमरिंदर सिंह की हां में हां नहीं मिला पाए। अमरिंदर सिंह के ऊपर उन्होंने पहले तो इशारे इशारे में हमला बोला। फिर उनके खिलाफ जहां मौका मिलता था, बोलने से नहीं चूकते थे। उन्होंने अमरिंदर सिंह पर माफियाओं के विरुद्ध घोषणा कार्यवाही न करने का आरोप लगाते हैं कई बार अपना विरोध जताया था।

इतना ही नहीं 2018 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के मना करने के बावजूद भी नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए और वहां पर आईएसआई चीफ से गले मिलकर एक नए विवाद को जन्म दे दिया था। हालांकि उन्होंने इस मामले पर अपनी सफाई भी पेश कर दी थी।

इसे भी पढ़ें :

“खत्म हुई नवजोत सिंह सिद्धू की राजनीतिक पारी”

2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान अभी अमरिंदर सिंह पर बादल परिवार के प्रति सॉफ्टकार्नर अपनाने का आरोप लगाते हुए एक विवादास्पद बयान दे दिया था। तब से अमरिंदर सिंह को सिद्धू और खटकने लगे थे।

अमरिंदर सिंह नवजोत सिंह सिद्धू के कार्यों से ज्यादा खुश नहीं थे। इसीलिए उन्होंने लोकसभा चुनाव के बाद उनके मंत्री पद के कार्यभार में फेरबदल कर दिया। सिद्धू इस बात से खुश नहीं थे और पहले तो वह इस मामले पर चुप्पी साधे रहे और राहुल गांधी से मिलकर अपनी नाराजगी जताई। इसके बाद जब पार्टी ने उनकी कोई मदद नहीं की तो उन्होंने 10 जून 2019 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

यह माना जा रहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू जल्दी ही अपनी कोई नई रणनीति बनाएंगे या फिर वह केजरीवाल के खेमे में जाकर गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाई मोर्चे को मजबूती प्रदान करने की कोशिश करेंगे। अगर वह केजरीवाल के साथ गए तो वहां भी उनकी ज्यादा दिन तक पटने वाली नहीं है।