बेंगलुरू: कर्नाटक में फ्लोर टेस्ट जारी है और इस बीच 19 विधायक आज विधानसभा में नहीं पहुंचे हैं। साफ है कि अगर आज ही विश्वास मत पर वोटिंग होती है तो कुमारस्वामी सरकार के लिए संकट बढ़ सकता है। इस दौरान मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने विधानसभा में विश्वास मत के दौरान कहा, मेरा और मेरे मंत्रियों का आत्मसम्मान है। मैं कुछ सफाई देना चाहता हूं। इस सरकार को अस्थिर करने के लिए कौन जिम्मेदार है?

वहीं कर्नाटक कांग्रेस विधायक श्रीमंत पाटिल जो कांग्रेस के अन्य विधायकों के साथ बंगलूरू के प्रकृति रिसॉर्ट में ठहरे हुए थे, वह कल देर रात को मुंबई पहुंचे हैं। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

विधानसभा में शक्ति परीक्षण के पहले मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और डिप्टी मुख्यमंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने कांग्रेस विधायकों के साथ बैठक की। प्राकृत रिजॉर्ट में कांग्रेस विधायकों के साथ कुमारस्वामी ने बैठक की और कई मुद्दों पर गंभीर चर्चा की।

सत्तरूढ़ जनता दल-(सेकुलर) और कांग्रेस पार्टी की गठबंधन सरकार के 16 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं, इसलिए सरकार पर संकट के गंभीर बादल मंडरा रहे हैं।

कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के.आर. रमेश कुमार ने सोमवार को यहां सदन की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, "मैंने मुख्यमंत्री को निर्देश दिया है कि वह विधानसभा में गुरुवार (जुलाई 18) को बहुमत साबित करें।"

विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में हुई बैठक में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी, विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता सिद्धारमैया और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता बी.एस. यदियुरप्पा शामिल रहे। गुरुवार को पूर्वान्ह 11 बजे सरकार को बहुमत सिद्ध करना है। राज्य में 16 विधायकों के इस्तीफे के बाद से भाजपा, गठबंधन सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करने को कह रही है।

बागी विधायकों में 13 कांग्रेस के और तीन जद (एस) के हैं, जिन्होंने इस्तीफा देने के बाद से कुमारस्वामी की सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की बात कही है। इस्तीफों को अभी विधानसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है, जिन्होंने कहा है कि उन्हें यह पढ़ने के लिए समय की आवश्यकता है कि दिए गए त्यागपत्र उचित प्रारूप में हैं या नहीं।

इस्तीफों को स्वीकार करने में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की जा रही देरी से नाखुश 15 विधायकों ने अयोग्य घोषित होने के डर से सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। 12 जुलाई को शीर्ष न्यायालय ने याचिका पर मंगलवार तक यथास्थिति बनाने को कहा, जिस दिन मामले पर एक बार फिर सुनवाई होनी है।

इसे भी पढ़ें :

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले कांग्रेस के बागी विधायक रोशन बेग से पूछताछ

कर्नाटक संकट : बागी विधायकों से स्पीकर ने की मुलाकात, कहा- सही फॉर्मेट में होने चाहिए इस्तीफे

गौरतलब है कि अध्यक्ष ने अभी तक बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें यह पता लगाने के लिए अध्ययन करने की आवश्यकता होगी कि वे उचित प्रारूप में हैं भी या नहीं।

बता दें कि 16 बागियों में से 15 ने 10 जुलाई और 13 जुलाई को सवोर्च्च न्यायालय में इस्तीफे स्वीकार करने में हो रही देरी के कारण विधानसभा अध्यक्ष को निदेर्श देने की गुहार लगाई थी। इस संबंध में शीर्ष अदालत मंगलवार को फिर से सुनवाई करेगी।

225 सदस्यीय विधानसभा में, कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन के पास बसपा व एक क्षेत्रीय पाटीर् के एक-एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक के समर्थन के साथ अध्यक्ष सहित कुल 118 विधायक हैं। यह आवश्यक बहुमत के निशान से सिर्फ पांच ही अधिक है।

अब अगर 16 बागी और दो निर्दलीय सहित सभी 18 विधायक सत्र में शामिल नहीं होते हैं, तो मतदान के लिए सदन की प्रभावी शक्ति 2०5 ही रह जाएगी, जिसमें भाजपा के 105 सदस्य होंगे। जबकि अध्यक्ष और नामित सदस्य को शामिल नहीं किया जाएगा। भाजपा नेता जी. मधुसुदन ने कहा कि इस स्थिति में साधारण बहुमत का आंकड़ा 1०3 होगा, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास केवल 1०० विधायक ही बचेंगे जिस वजह से वे बहुमत साबित नहीं कर पाएंगे।