नई दिल्ली : राहुल गांधी के कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद से कांग्रेस के नए मुखिया की तलाश शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि जुलाई महीने के दूसरे सप्ताह में कांग्रेस पार्टी को उसका नया नेता मिल जाएगा।

कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष पद के लिए तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं और यह माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी उसी व्यक्ति के हाथ में अपना नेतृत्व सौंपेगी, जो नेहरू गांधी परिवार का खासमखास हो और वह उन्हीं के दिशा निर्देश के अनुरूप पार्टी को आगे ले जा सके। अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने के बाद वह मनमाने तौर पर काम न करने लगे।

सबको साथ लेकर चलने की क्षमता

इसके अलावा उस नए अध्यक्ष में तमाम तरह की खूबियों खोजी जा रही हैं, जिसके लिए कार्यकर्ता अपने-अपने स्तर से राय भी दे रहे हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व किसी ऐसे व्यक्ति के हाथ में दिया जाएगा जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान होने के साथ-साथ वह गांधी परिवार का विश्वसनीय व्यक्ति हो और उसके अंदर सबको साथ लेकर चलने की क्षमता हो।

इलाके में हो जनाधार

इतना ही नहीं यह भी देखा जा रहा है कि वह व्यक्ति केवल बड़े-बड़े नेताओं का दरबारी न हो, बल्कि उसका अपने इलाके के साथ साथ कम से कम उसके राज्य में एक बड़ा प्रभाव हो ताकि वह अपने आप एक बड़े मास लीडर के रूप में प्रोजेक्ट कर सकेे। अन्यथा उस पर भी एक रबर स्टैंप होने का ठप्पा लग सकता है।

संसद व सड़क पर जूझने की क्षमता

कांग्रेस पार्टी के कई नेता चाहते हैं कि उसका अगला अध्यक्ष ऐसा हो जो संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष करने की क्षमता रखता हो और किसी भी मुद्दे पर मोदी सरकार को परास्त करने में माहिर हो। जरूरत व मौके के हिसाब से मोदी सरकार ही नहीं अन्य विरोधी दलों को करारा जवाब देने की क्षमता रखता हो।

हिन्दी व अंग्रेजी का जानकार

कांग्रेस पार्टी के अगले अध्यक्ष में हिंदी भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी होना भी प्रमुख गुण माना जा रहा है, ताकि वह उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक अपना प्रभाव छोड़ सके। इतना ही नहीं वह हर इलाके में जाकर बिना कागजी लिखा पढ़ी के जनसभाओं को हिन्दी या भाषा के अनुरूप संबोधित कर सके। उत्तर भारत में हिंदी भाषी और दक्षिण भारत में अंग्रेजी या उस भाषा के जानने वाले नेताओं का दबदबा है कांग्रेस के अगले अध्यक्ष को इस बंधन को तोड़ना होगा और सबको एक साथ रखने के लिए इन दोनों भाषाओं की जानकारी जरूर होनी चाहिए अन्यथा वह किसी और पर निर्भर हो सकता है।

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ईमानदार व बेदाग छवि

इन सबके अलावा सबसे ज्यादा इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि जिस भी व्यक्ति को कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कुर्सी सौंपी जाए वह बेदाग छवि का हो। उसके ऊपर कभी भी किसी तरह का कोई राजनीतिक या अन्य तरह के अपराध की कोई पृष्ठभूमि ना हो और ना ही उसके ऊपर कभी कोई दाग लगा हो, जिससे मोदी सरकार के ऊपर आरोप प्रत्यारोप के दौरान कांग्रेस पार्टी को बैकफुट पर न जाना पड़े।

अब इन बातों के चलते कई कद्दावर नेता अपने आप को इस रेस से बाहर मान रहे हैं। वहीं कुछ युवा नेता इसको लेकर अपनी दावेदारी तेज करने का जुगाड़ लगा रहे हैं।