बेंगलुरू। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जनता दल (सेकुलर) गठबंधन के 13 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। पहले खबर थी कि 11 विधायक ने इस्तीफा दिया है। लेकिन खबरों की मानें तो मुनीरत्ना ने के अलावा आनंद सिंह भी इस्तीफा दे चुके हैं। इस्तीफे के बाद राज्य सरकार पर आए गंभीर संकट से निपटने के लिए कांग्रेस के राज्य प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल बेंगलुरू पहुंच चुके हैं। वहीं इस मसले से निपटने के लिए कई कांग्रेसी दिग्गज नेता इमरजेंसी मीटिंग में शामिल हो रहे है।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, वेणुगोपाल केरल में थे और अपराह्न् में वह बेंगलुरू के लिए रवाना हो गए और वह एक साल पुरानी गठबंधन सरकार को बचाने की कोशिश में शाम को कांग्रेस विधायकों से मिलेंगे।

सूत्रों ने कहा कि पार्टी महासचिव वेणुगोपाल कुछ नाराज विधायकों को कैबिनेट रैंक की पेशकश कर सकते हैं। कर्नाटक का ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस लोकसभा चुनाव में पराजय के मुद्दे पर राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद एक बड़े नेतृत्व संकट का सामना कर रही है।

ये नेता हुए शामिल

विधायकों के इस्तीफे के बाद पार्टी ने आपात बैठक बुलाई है। इसमें मीटिंग में गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, आनंद शर्मा, मल्लिकार्जुन खड़गे, मुकुल वासनिक, ज्योतिरादित्य सिंधिया, पी चिदंबरम, दीपेंद्र हुड्डा शामिल हैं।

3 विधायकों ने रखी शर्त

इस्‍तीफा देने वाले कांग्रेस के तीन विधायकों ने डीके शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री के सामने एक शर्त रखी है। तीनों विधायक एसटी सोमशेखर, बैराठी बसवराज और मुनिरत्न ने कहा है कि वे चाहते हैं कि कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया जाए। इन विधायकों का कहना है कि यदि सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बनते हैं तो वे इस्तीफा वापस ले लेंगे। उनका कहना है कि अगर आलाकमान सिद्धारमैया को सीएम बनाता है तो वे इस्तीफा वापस लेने को तैयार हैं।

इस मामले पर विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी को लेने जाना था, इसलिए वह घर चले गए। रविवार को छुट्टी है और सोमवार को वह बेंगलुरु में नहीं हैं। इसलिए अब इस मामले को वह मंगलवार को देखेंगे।

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कर्नाटक में सत्तारूढ़ 13 महीने पुरानी कांग्रेस-जनता दल (सेकुलर) गठबंधन सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए कांग्रेस के आठ और जद (एस) के तीन विधायकों ने शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में अपने इस्तीफे सौंप दिए।

मुझे निजी सचिव से मिली विधायकों के इस्तीफे की जानकारी

विधानसभा अध्यक्ष के.आर. रमेश कुमार ने यहां अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, "मुझे मेरे निजी सचिव से पता चला है कि 11 विधायकों ने मेरे कार्यालय में त्याग-पत्र दे दिए हैं। उन्हें उसकी पावती दे दी गई। मैं उन्हें मंगलवार (9 जुलाई) को देखूंगा क्योंकि सोमवार को मैं छुट्टी पर हूं।"

इन विधायको ने दिया इस्तीफा

कांग्रेस सूत्रों ने नई दिल्ली में कहा कि राज्य के प्रभारी के.सी. वेणुगोपाल कांग्रेस विधायकों से मुलाकात के लिए पहुंच चुके हैं। इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के पांच विधायकों में प्रतापगौड़ा पाटील (मस्की), बी.सी. पाटील (हिरेकेरुर), रमेश जरकीहोली (गोकक), शिवराम हेब्बर (येल्लापुर), महेश कुमताहल्ली (अथानी), रामालिंगा रेड्डी (बीटीएम लायौट), एस.टी. सोमशेकर (यशवंतपुर) और एस.एन. सुब्बा रेड्डी (कोलार में केजीएफ) शामिल हैं। वहीं जद (एस) के तीन विधायकों में ए.एच. विश्वनाथ हुनसुर, एन. नारायणा गौड़ा के.आर. पेटे और गोपालैया (बेंगलुरू उत्तरपश्चिम में महालक्ष्मीम) शामिल हैं।

यद्यपि जरकीहोली ने पहली जुलाई को ही इस्तीफा दे दिया था, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था, क्योंकि यह उनके कार्यालय को फैक्स के जरिए भेजा गया था, जो प्रक्रिया के खिलाफ है।

कांग्रेस विधायक आनंद सिंह ने भी पहली जुलाई को इस्तीफा दे दिया था। चूंकि उन्होंने अपना इस्तीफा खुद जाकर विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा था, लिहाजा इसे उन्होंने स्वीकार किया था। चूंकि विधायकों की मुलाकात विधानसभा अध्यक्ष से उनके कार्यालय में नहीं हो पाई, इसलिए वे अपने इस्तीफे के निर्णय से राज्यपाल वजुभाई वाला को अवगत कराने के लिए राजभवन गए।

बेंगलुरू दक्षिण में बीटीएम लायौट विधासभा सीट से सात बार के विधायक रेड्डी पूर्व की कांग्रेस सरकार में मंत्री थे। कांग्रेस के तीन और विधायक कथित तौर पर इस्तीफे पर विचार कर रहे हैं। इनमें रेड्डी की बेटी सौम्या(जयानगर), बयारती बासवराज (के.आर. पुरम), और मुनिरत्ना (आर.आर. नगर) शामिल हैं।

भाजपा के पास है 105 विधायक

कर्नाटक की 225 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन सरकार के पक्ष में 118 विधायक थे। यह संख्या बहुमत के लिए जरूरी 113 से पांच अधिक थी। इसमें कांग्रेस के 79 विधायक (विधानसभा अध्यक्ष सहित), जद (एस) के 37 और और तीन अन्य विधायक शामिल रहे हैं। तीन अन्य विधायकों में एक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से, एक कर्नाटक प्रग्न्यवंथा जनता पार्टी (केपीजेपी) से और एक निर्दलीय विधायक है।विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास 105 विधायक हैं।