नई दिल्ली : कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद नया नेता चुनने की कोशिशें तेज हो गई है । माना जा रहा है कि नेहरू-गांधी परिवार के किसी खास-खास व्यक्ति के हाथों में कांग्रेस पार्टी की कमान जल्द ही सौंप दी जाएगी।

हालांकि कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता इस बारे में अभी कोई खुलासा नहीं करने को तैयार हैं, लेकिन सोनिया गांधी अपने पूरे परिवार के साथ विदेश जाकर नया अध्यक्ष चुनने में कोई दखलंदाजी ना देने का संकेत दे दिया है।

कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया में नेहरू गांधी परिवार का कोई दखल नहीं माना जा रहा है और पार्टी अपने विवेक से नया अध्यक्ष का चुनाव करेगी । कुछ ऐसी बात का संदेश देने के लिए सोनिया गांधी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अमेरिका चले गए हैं।बताया जा रहा है कि यह सब नेता नए अध्यक्ष का चुनाव होने के बाद ही वापस आएंगे।

ऐसी स्थिति यह मानी जा रही है कि जब नया अध्यक्ष चुनने के लिए कांग्रेस वर्किंग कमेटी की आपात बैठक होगी उसमें नेहरू गांधी परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं होगा।

इस बैठक में सबसे ज्यादा उम्मीद मोतीलाल बोरा के ऊपर टिकी हुई है । माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें कमान सौंप सकती है अगर किसी कारण से मोतीलाल वोरा के नाम पर सहमति नहीं बनी तो अगली पसंद के रूप में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आगे किया जाएगा।

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अशोक गहलोत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ नेहरू-गांधी परिवार के काफी विश्वासपात्र माने जाते हैं।

इस बात के लिए अभी कुछ समय पहले मोतीलाल वोरा ने भी संकेत दिया था कि अध्यक्ष पद की रेस में अशोक गहलोत का नाम है । कल राहुल गांधी अपना इस्तीफा वापस नहीं लेते तो पार्टी उनके नाम पर विचार कर सकती है। मोतीलाल वोरा जहां कांग्रेस के महासचिव है, वहीं अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री हैं।

फिर से नहीं दोहराना चाहेगी यह गलती

कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष चुनने के मामले पर सीताराम केसरी वाली गलती नहीं दोहराना चाहेगी, क्योंकि उनके समय में कांग्रेस पार्टी के कई नेता दरकिनार कर दिए गए थे, जो भी गांधी परिवार के करीब थे। खुद सीताराम केसरी के रिश्ते सोनिया गांधी से अच्छे नहीं रहे।

आपको बता दें कि सीताराम केसरी को वर्ष 1996 में कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था और वह 1998 तक कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहे। वह पीवी नरसिम्हा राव के सितंबर 1996 में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद नए अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।